फिरोजपुर डिस्ट्रीब्यूटरी पर पुल न बनने से ग्रामीण परेशान, लंबा रास्ता तय करने को मजबूर
सद्दाम हुसैन
पिनगवां । शिकरावा और कुम्हरेडा गांव के बीच बहने वाली सिंचाई नहर ने जहां खेतों को पानी दिया, वहीं दो गांवों के बीच की दूरी को भी बढ़ा दिया। पिछले करीब 50 वर्षों से ग्रामीण इस नहर पर पुल बनने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन आज तक उनकी यह मांग पूरी नहीं हो सकी है। नतीजा यह है कि दोनों गांवों के लोगों को रोजमर्रा के कामों के लिए लंबा और कठिन रास्ता तय करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, कुम्हरेडा से शिकरावा के लिए पक्की सड़क तो बनी हुई है, लेकिन सिंचाई नहर (फिरोजपुर डिस्ट्रीब्यूटरी) के निर्माण के बाद से यह रास्ता बीच में ही बाधित हो गया। ऐसे में लोगों को जहटाना सड़क से होकर नहर की पटरी के रास्ते गुजरना पड़ता है। यह वैकल्पिक रास्ता खासकर बरसात के मौसम में बेहद खराब हो जाता है, जिससे आवागमन लगभग ठप जैसा हो जाता है। गांव के मकसूद एडवोकेट, शोकीन एडवोकेट, तारिफ खान, नियामत खान, डॉ. अजीज और आबिद हुसैन सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि यह सड़क विभाग द्वारा चकबंदी के रास्ते पर बनाई गई थी। लेकिन वर्ष 1976-77 में नहर निर्माण के दौरान इस मार्ग को अवरुद्ध कर दिया गया, जिसके बाद से आज तक पुल का निर्माण नहीं किया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या के कारण बच्चों की पढ़ाई, किसानों की खेती और आम जनजीवन पर गहरा असर पड़ रहा है। आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब कच्चा रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है। लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि शीघ्र ही सिंचाई नहर पर पुल का निर्माण कराया जाए, ताकि दोनों गांवों के बीच सुगम आवागमन बहाल हो सके। उनका कहना है कि यदि पुल बन जाता है तो न केवल दूरी कम होगी, बल्कि क्षेत्र के विकास को भी गति मिलेगी।
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करीब 400 फीट दूरी पर पहले से पुल बना हुआ है। विभाग की अपनी गाइडलाइन होती हैं, जिनके अनुसार ही कार्य किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस स्थान पर नए पुल निर्माण के संबंध में अब तक ग्रामीणों की कोई आधिकारिक मांग प्राप्त नहीं हुई है।
-मुबारिक खान कनिष्ठ अभियंता