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Noida News: वाहन फिटनेस जांच प्रणाली पूरी तरह होगी स्वचालित

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नंद नगरी में स्टेशन के लिए निविदा जारी, डिजिटल मशीनों, सेंसर और कंप्यूटराइज्ड डाटा से होगी जांच
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02 वर्ष में हर जोन में एक स्टेशन बनाना लक्ष्य

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। डीटीसी ने राजधानी में वाहन फिटनेस जांच प्रणाली को पूरी तरह स्वचालित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। निगम ने नंद नगरी बस डिपो में अत्याधुनिक ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) स्थापित करने के लिए निविदा जारी कर दी है। इसके तहत वाहनों की फिटनेस जांच अब मानव निरीक्षण पर निर्भर नहीं रहेगी बल्कि डिजिटल मशीनों, सेंसर और कंप्यूटराइज्ड डाटा के आधार पर होगी।
यह पहल दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग के उस व्यापक अभियान का हिस्सा है जिसके तहत सड़क सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण और वाहन प्रबंधन को वैज्ञानिक रूप देने की तैयारी है। सरकार का उद्देश्य है कि फिटनेस टेस्ट प्रक्रिया में पारदर्शिता आए, फर्जी सर्टिफिकेट बंद हों और सड़क पर चलने वाले वाहनों की वास्तविक स्थिति दर्ज हो सके। नंद नगरी में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन की आधारशिला मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता बीते माह रखी थी। अब डीटीसी की तरफ से उपकरण आदि स्थापित करने के लिए निविदा जारी की गई है।
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कुछ ही मिनटों में होगी जांच



अधिकारियों ने बताया कि नंद नगरी डिपो में बनने वाला यह एटीएस एक पूर्ण स्वचालित फिटनेस टेस्ट सेंटर होगा। यहां आने वाले वाहनों की जांच रोलर ब्रेक टेस्टर, सस्पेंशन टेस्टर, साइड-स्लिप टेस्टर, जॉइंट-प्ले टेस्टर और स्पीडोमीटर जैसी मशीनों से की जाएगी। ये सभी उपकरण डिजिटल रूप से जुड़े होंगे और रिपोर्टिंग सिस्टम सीधे केंद्रीय सर्वर से समन्वित रहेगा। प्रत्येक वाहन का ब्रेकिंग सिस्टम, सस्पेंशन, साइड स्लिप, लाइट और उत्सर्जन स्तर कुछ ही मिनटों में जांचा जा सकेगा। परिणाम तुरंत सॉफ्टवेयर के माध्यम से दर्ज होंगे और वाहन मालिक को प्रमाणित फिटनेस रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाएगी। इस परियोजना के लिए इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (आईसीएटी), मानेसर को तकनीकी सलाहकार संस्था बनाया गया है। यह संस्थान उपकरणों के चयन, इंस्टॉलेशन और परीक्षण प्रक्रिया की गुणवत्ता की निगरानी करेगा। अभी तक राजधानी में वाहन फिटनेस जांच में भारी मानव हस्तक्षेप रहता था जिससे अनियमितता और भ्रष्टाचार की शिकायतें आती रही हैं। नया एटीएस सिस्टम इन कमियों को दूर करेगा।
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हर जोन में बनेगा एक एटीएस

सरकार का लक्ष्य है कि अगले दो वर्षों में हर जोन में कम-से-कम एक स्वचालित टेस्टिंग स्टेशन तैयार हो। नंद नगरी में यह पायलट परियोजना सफल रहती है तो ओखला, रोहिणी, हरी नगर और बवाना डिपो में भी एटीएस केंद्र स्थापित किए जाएंगे। दिल्ली में वर्तमान में सिर्फ व्यावसायिक और परिवहन से जुड़े वाहनों की ही फिटनेस जांच होती है। इसके तहत आठ साल तक प्रति दो साल और इसके बाद वाहन की उम्र पूरी होने तक प्रति साल जांच अनिवार्य है। दिल्ली में निजी वाहनों के लिए डीजल और पेट्रोल के वाहनों की उम्र क्रमश: 10 व 15 साल निर्धारित है जबकि अन्य राज्यों में फिटनेस जांच के आधार पर वाहनों को चलाने की अनुमति दी जाती है। अधिकारियों ने बताया कि सभी सेंटर ऑटोमेटेड होंगे और इनमें मानवीय हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं होगी। सरकार इस प्रयास में है कि पुराने वाहनों की चलने की उम्र की सीमा फिटनेस के आधार पर दी जाए। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में जाने के साथ ही फिटनेस सेंटर की व्यवस्था करना भी जरूरी है ताकि सुप्रीम कोर्ट में सरकार पर्याप्त इंतजाम की बात कह सके।



यह होगा लाभ

-हर वाहन की रियल-टाइम रिपोर्टिंग और ऑनलाइन प्रमाणन संभव होगा।

-भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा।

-पुराने, खराब या प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को पहचानना आसान होगा।
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