- सीएम ने मंच से गिनाई उपलब्धियां, कहा- नारी सशक्तीकरण भाषण से नहीं, काम से होगा
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। मुख्यमंत्री ने प्रेरणा विमर्श के मंच से आगामी विधानसभा चुनाव को साधते हुए सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। महिला सशक्तीकरण, युवाओं को रोजगार, स्टार्टअप और प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि कभी बीमारू कहा जाने वाला उत्तर प्रदेश अब 'रेवेन्यू सरप्लस स्टेट' और देश का ग्रोथ इंजन बन चुका है। विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग पहले यूपी के सामने पहचान का संकट खड़ा करते थे, वे फिर से दंगा, कर्फ्यू, समाज को बांटने, भेदभाव, अव्यवस्था और अराजकता का दौर लाना चाहते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नारी गरिमा की रक्षा और महिला सशक्तीकरण केवल भाषणों से नहीं होगा, बल्कि इसके लिए योजनाओं में महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है। देश में तीन करोड़ परिवारों को 'घरौनी' के माध्यम से मकान का मालिकाना अधिकार दिया गया है, जिसमें पहला अधिकार महिलाओं का है। इसके अलावा 12 करोड़ परिवारों को एलपीजी कनेक्शन और 12 करोड़ घरों में शौचालय की सुविधा दी गई है। यूपी में 54 हजार बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सखी गांवों में बैंकिंग सेवाएं दे रही हैं। उन्होंने झांसी के बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर का जिक्र करते हुए कहा कि 2019 में पांच महिलाओं से शुरू हुए इस समूह से आज 62 हजार महिलाएं जुड़ी हैं और इसका टर्नओवर 115 करोड़ रुपये है। हर महिला आठ से 10 हजार रुपये महीना कमा रही है। आगरा, काशी, गोरखपुर और लखनऊ में भी मिल्क प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं, जिनसे करीब चार लाख महिलाएं जुड़ी हैं।
महिला पुलिस 10 हजार से बढ़कर 44 हजार हुई
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में यूपी पुलिस में केवल 10 हजार महिलाएं थीं, जिनकी संख्या अब बढ़कर 44 हजार हो गई है। अगले तीन-चार महीनों में यह आंकड़ा 50 हजार के पार हो जाएगा। प्रदेश में महिला वर्कफोर्स की भागीदारी भी 12 प्रतिशत से बढ़कर 36-37 प्रतिशत हो गई है। डिजिटल एंटरप्रेन्योरशिप की नई योजना के तहत आठ हजार न्याय पंचायतों में से चार हजार में महिला उद्यमियों को जोड़कर प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रदेश में 56 प्रतिशत युवा हैं। पिछले साढ़े नौ वर्षों में 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं और सवा तीन करोड़ लोगों को एमएसएमई सेक्टर में काम मिला है। इसके अलावा, पहले जहां 120 से कम स्टार्टअप थे, उनकी संख्या अब बढ़कर 24 हजार से अधिक हो गई है।
अंग्रेजों के आने से पहले भारत शिक्षित व आत्मनिर्भर था
समापन समारोह में अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन ने कहा कि जो समाज अपने भूतकाल के गौरव, वर्तमान की पीड़ा और भविष्य के संकल्पों को पहचानता है, वही देश को सही दिशा में आगे बढ़ा सकता है। हमारी संस्कृति में स्व का अर्थ अपने धर्म, संस्कारों और नैतिक मूल्यों को समझना है। अंग्रेजों के आने से पहले वैश्विक जीडीपी में भारत का योगदान 24 प्रतिशत था, जो आजादी के समय घटकर केवल 3 प्रतिशत रह गया था। अंग्रेजों के आने से पहले भारत पूर्णरूप से शिक्षित व आत्मनिर्भर था। वर्ष 1947 में देश आजाद तो हो गया, लेकिन औपनिवेशिक तंत्र से पूरी तरह मुक्ति पाने की प्रक्रिया अभी भी जारी है।