मूलरूप से पटना निवासी इशिता किशोर वर्तमान में ग्रेटर नोएडा के पी-3 सेक्टर के जलवायु विहार में रहती है। उन्होंने दिल्ली के एयरफोर्स बाल भारती स्कूल से प्राथमिक शिक्षा ली है। इशिता के पिता विंग कमांडर संजय किशोर इंडियन एयरफोर्स में थे। वर्ष 2004 में उनके पिता का देहांत हो गया था। अब वह मां ज्योति किशोर और बड़े भाई अधिवक्ता ईशान किशोर के साथ रहीं है। इशिता बताती हैं कि वह सिविल सर्विसेज के जरिए देशसेवा में आना चाहती थीं। शुरू से ही वह बेहद मेहनती विद्यार्थी रही हैं। दसवीं में उसके 90 फीसदी से अधिक अंक और 12वीं में 97 फीसदी अंक हासिल किए। इसके बाद उसने दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स से ईकोनॉमिक्स विषय से बीए ऑनर्स किया है।
वर्ष 2017 में स्नातक करने के साथ ही उसने नोएडा की कंपनी अर्नेस्ट एंड यंग में प्रबंधक के रूप में जॉब ज्वाइन कर ली। दो वर्ष जॉब करने के बाद इशिता ने यूपीएससी की तैयारी के लिए जॉब छोड़ दी। वर्ष 2019-20 और 2020-21 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा दी, लेकिन प्रिलिम्स से आगे नहीं बढ़ पाई। दो बार मेंस परीक्षा में न पहुंच पाने की उनको कसक तो थी लेकिन जॉब के दौरान उनको जो आत्मविश्वास मिला, वह निराशा नहीं लाया। इशिता ने हार नहीं मानी और आखिरकार कड़ी मेहनत और लगन से सफलता प्राप्त की।
इशिता के टॉप करने की सूचना दोपहर में जैसे ही परिवार को लगी तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रह गया। इस दौरान परिवार ने मिठाई खिलाई। यूपीएससी में टॉप करने की जहां-जहां भी उनके परिवार और रिश्तेदारों का खबर लगी तो मोबाइल पर बधाइयों का तांता लग गया।
2018 में ग्रेटर नोएडा आ गया था परिवार
वर्ष 2018 में वह उनका परिवार दिल्ली से ग्रेटर नोएडा के पी-3 स्थित जलवायु विहार आ गया। यहां उनकी मां नॉलेज पार्क स्थित भरतराम पब्लिक स्कूल में एडमिन की जॉब कर रही थीं। पिछले वर्ष नवंबर में ही वह सेवानिवृत्त हुई हैं। इशिता के बड़े भाई अधिवक्ता ईशान हर्ष यहीं पर रहकर प्रैक्टिस कर रहे हैं।
'परिवार ने दिया मुझे समर्थन'
समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए इशिता ने कहा कि मेरे परिवार ने मुझे असीम समर्थन दिया, भले ही मैंने प्रीलिम्स को दो बार पास नहीं किया लेकिन उन्हें मुझ पर बहुत विश्वास था। जिस तरह से उन्होंने मुझे आगे बढ़ाया और मेरे लिए चीजों को आसान बनाया, मैं उसके लिए उनकी आभारी रहूंगी।