यूपी में तैयार हो रही पांचवीं पीढ़ी की पिस्टल
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बर्फीले पहाड़ हों, रेगिस्तान की तपती गर्मी या फिर शहरी क्षेत्रों में चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन, सुरक्षा बलों को ऐसे हथियारों की जरूरत होती है जो अलग-अलग परिस्थितियों में भरोसेमंद प्रदर्शन कर सकें। इन्हीं परिचालन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कानपुर की कैमस्टार डिफेंस ने 9×19 एमएम की ‘कैमस्टार मार्क-1’ स्ट्राइकर-फायर्ड पिस्टल विकसित की है। रोहित भाटिया ने बताया कि इसका डिजाइन सेना, विशेष बलों, पुलिस और अन्य अधिकृत सुरक्षा इकाइयों की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है। इसके साथ कंपनी ने 4.5 एमएम पिस्टल भी विकसित की है।
कैमस्टार डिफेंस के निदेशक रिक्की सियाल ने बताया कि 9×19 एमएम पिस्टल का निर्माण लखनऊ और कानपुर में किया जा रहा है। उनका दावा है कि देश में इस श्रेणी की पांचवीं पीढ़ी की पिस्टल का निर्माण करने वाली वह अकेली कंपनी है। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना के जवानों को रेगिस्तान की गर्मी से लेकर पहाड़ी इलाकों और बदलते मौसम के बीच काम करना पड़ता है। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पिस्टल में मजबूती, टिकाऊपन और आसान रखरखाव पर जोर दिया गया है।
कंपनी इसे सेना के साथ विशेष बलों, पुलिस और अन्य अधिकृत सुरक्षा इकाइयों की जरूरतों के अनुरूप बता रही है। कैमस्टार मार्क-1 में पॉलिमर फ्रेम और ड्यूटी-ग्रेड स्टील कंपोनेंट लगाए गए हैं। इसकी मैगजीन क्षमता 15/17 राउंड है। इसे जंगरोधी बनाने के साथ मॉड्यूलर डिजाइन दिया गया है। कंपनी ने इसके निर्माण में स्वदेशी सामग्री के इस्तेमाल का दावा भी किया है। वहीं प्रशिक्षण और निशानेबाजी के लिए 4.5 एमएम (.177 कैलिबर) एयर पिस्टल श्रेणी में विकसित किया है। ऐसे उपकरणों का इस्तेमाल नए रंगरूटों और प्रशिक्षणार्थियों के शुरुआती अभ्यास में किया जा सकता है, जहां लाइव-फायर प्रशिक्षण की तुलना में अलग प्रशिक्षण व्यवस्था की जरूरत होती है।
स्वदेशी रक्षा निर्माण पर फोकस
कैमस्टार डिफेंस के प्रतिनिधियों का कहना है कि लक्ष्य भारत में ही आधुनिक रक्षा उपकरण विकसित करना है। कंपनी की ओर से विकसित पिस्टल को भी इसी स्वदेशी रक्षा उत्पादन की कड़ी के रूप में पेश किया जा रहा है। किसी भी सैन्य या सुरक्षा उपकरण को बलों में शामिल किए जाने से पहले निर्धारित तकनीकी परीक्षण, प्रमाणन, मूल्यांकन और खरीद प्रक्रिया से गुजरना होता है। इसलिए फिलहाल इसके प्रदर्शन से जुड़े दावों को कंपनी के दावे के तौर पर देखा जाना चाहिए।