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Noida News: सोसाइटियों में अप्रशिक्षित गार्ड बन रहे विवाद की वजह

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(पाक्षिक प्लान)
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फोटो
-न सुरक्षा की समझ, न तनाव प्रबंधन का हुनर, हर छोटी बात पर बिगड़ रहा माहौल

मोहम्मद बिलाल
ग्रेटर नोएडा। जिले की हाईराइज आवासीय सोसाइटियों में सुरक्षा गार्ड तैनात करने का उद्देश्य निवासियों की सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखना है। लेकिन हाल के दिनों में सोसाइटियों में गार्डों, निवासियों और विजिटर के बीच विवाद की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसका कारण सोसाइटी में बिल्डर द्वारा गार्डों की तैनात से पहले निजी सुरक्षा एजेंसी विनियमन (पसारा) अधिनियम की अनदेखी है। यही कारण है कि सोसाइटियों में तैनात सुरक्षा गार्डों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
जिले में 500 से अधिक हाईराइज सोसाइटी, सेक्टर हैं। यही कारण है जिले में 500 से अधिक कंपनियों ने सेक्टर और सोसाइटी की सुरक्षा करने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस से पसारा लाइसेंस ले रखा है। नियम के तहत लाइसेंस प्राप्त करने वाली कंपनियों को प्रशिक्षण देने के बाद गार्डों को फील्ड में तैनात किया जाना चाहिए। गार्डों की तैनाती से पहले अनुमोदन कराया जाना चाहिए। जिससे विवाद पर आवश्यक जांच कर कार्रवाई की जा सके। मगर एओए गठित नहीं होने से ज्यादातर सोसाइटी में तैनात गार्डों की भूमिका केवल विजिटर को रोकने तक सीमित रह गई है। जबकि सोसाइटियों में पार्किंग को लेकर विवाद, बच्चों की शरारतों पर बहस, विजिटर्स की एंट्री को लेकर टकराव में गार्डों की भूमिका निर्णायक होती है। लेकिन अप्रशिक्षित गार्ड स्थिति को संभालने के बजाय खुद उसमें उलझ जाते हैं या किनारा कर लेते हैं। कुछ मामलों में तो गार्डों तीखी बहस करने के बाद पक्षपातपूर्ण रवैये अपनाकर छोटे विवाद को बड़े झगड़े में बदल जाते हैं।
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-सोसाइटी में गार्डों के बजाए देखने में आता है कि बाउंसरों तैनाती होती है। जो गार्ड तैनात होते हैं वह कई जगह ड्यूटी करते हैं। गार्डों की संख्या भी कम होती है। अप्रशिक्षित गार्ड सोसाइटी की सुरक्षा के लिए चुनौती बनते हैं। उन्हें प्रशिक्षण दिया जाना जरूरी है।
-दिनकर पांडेय, निवासी अजनारा होम्स

अप्रैल में गार्डों और निवासियों के बीच मारपीट के प्रमुख मामलेंः
केस-1
बिसरख कोतवाली क्षेत्र के अम्रपाली लेजर वैली सोसाइटी में बिना स्टीकर की गाड़ी जाने से गार्ड ने मना किया तो निवासी भड़क गया और दोनों के बीच मारपीट हुई। आरोप है कि निवासियों ने गार्ड की जमकर पिटाई की थी। वायरल वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की थी।
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केस-2
बीटा-2 कोतवाली क्षेत्र की केंद्रीय विहार सोसाइटी में एक फ्लैट मालिक की गाड़ी पर सोसाइटी का स्टीकर नहीं होने पर गार्ड ने उन्हें रोका तो दोनों पक्षों में बहस शुरू हो गई। मारपीट में गार्ड और निवासी को चोट आई थी। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की थी।
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निजी सुरक्षा एजेंसी को पसारा लाइसेंस लेना जरूरी है। गार्डों को प्रशिक्षण के साथ तैनाती से पहले अनुमोदन जरूरी है। सत्यापन अभियान में बिना लाइसेंस चल रही सुरक्षा एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-राजीव नारायण मिश्र, अपर पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था)
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