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सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट दिलाएगा निजात

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2 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से 119 सेक्टरों को होगा फायदा
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नोएडा। सेक्टर-168 और सेक्टर-123 में 259 करोड़ की लागत से बन रहा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) 119 सेक्टरों को लाभ पहुंचाएगा। प्लांट में सीवर के पानी को शुद्ध करने के बाद बहुमुखी उपयोग किया जा सकेगा। प्राधिकरण के दावे के मुताबिक पीने और घरेलू कामों में छोड़कर कई सेक्टरों में इसका उपयोग किया जा सकेगा। इससे प्राधिकरण की परियोजनाओं सहित पार्कों को भी फायदा पहुंचेगा। खास बात यह कि एनजीटी के मानकों को पूरा करने में यह काफी काम आएगा। एसटीपी से जल शुद्ध करने के बाद इसका उपयोग यूजीआर यानी प्राधिकरण के बनाए भूमिगत जलाशय में किया जाता है। यहां इसे इकट्ठा किया जाएगा। फिर जरूरत के हिसाब से वितरण किया जाएगा। प्रदूषण हटाने के लिए टैंकरों से पानी के छिड़काव में उपयोग में लाया जाएगा। प्राधिकरण की चल रही परियोजनाओं में पानी की कमी पूरी की जाएगी
ऐसे करेगा काम
सेक्टरों में बढ़ने वाली जनसंख्या को देख इसे डिजाइन किया गया है। अलग-अलग सेक्टरों से निकलने वाला सीवर आसपास के सीवेज पंपिंग स्टेशन तक पहुंचेगा। इसके बाद यहां से डीप सीवर लाइन से शोधन के लिए एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा। फिर गंदे पानी को साफ कर उपयोग के लिए वितरित किया जाएगा।
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भूमिगत जल के उपयोग पर मनाही
एनजीटी की गाइडलाइंस के मुताबिक सिंचाई के लिए भूमिगत जल के उपयोग पर मनाही है। ऐसे में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का शोधित पानी सिंचाई के काम में आ सकता है। इससे मानक का उल्लंघन भी नहीं होगा और काम भी पूरा हो जाएगा। मानक के अनुरूप शोधित करने से इसकी उत्पादकता भी बढ़ जाएगी।
बड़े पार्कों तक बिछाई जा सकती है लाइनें
अधिकारियों का कहना है कि इसके बनने के बाद सेक्टर-151ए गोल्फ कोर्स, सेक्टर-91 बायोडायवर्सिटी पार्क, सेक्टर-150 शहीद भगत सिंह पार्क सहित अन्य पार्कों तक लाइनें बिछाई जा सकती हैं। वहां पानी का उपयोग पौधों व ग्रीन बेल्ट के लिए किया जा सकेगा। सीधी लाइन होने से टैंकरों की जरूरत महसूस नहीं होगी।
दिसंबर में पूरी होगी परियोजना
सेक्टर-168 में 100 और सेक्टर-123 में 80 एमएलडी क्षमता के एसटीपी का निर्माण चल रहा है। इसमें पीक ऑवर में मिलियन लीटर पानी के रोजाना शोधन की क्षमता है। इसका काम दिसंबर तक पूरा होगा। अभी छह छोटे-छोटे एसटीपी से काम चलाया जा रहा है, जो कि 25 से 54 एमएलडी के हैं। यह सेक्टर-54, 50, 123 और 168 में हैं।
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प्राधिकरण के सेक्टर-123 और 168 में निर्माणाधीन बड़े एसटीपी से शहर के 119 सेक्टरों को फायदा पहुंचेगा। इसे पीने के पानी और घरेलू उपयोग को छोड़कर कहीं भी उपयोग में लाया जा सकेगा। इससे शहर में पानी के स्रोत की क्षमता बढ़ेगी।
- एमके जैन, सीनियर मैनेजर, जल विभाग प्राधिकरण
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