इंडियन टेंट टर्टल प्रजाति के कछुओं को गढ़ गंगा व चंबल नदी से पकड़कर बेचते थे
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। बीटा-2 कोतवाली पुलिस ने पीपल्स फॉर एनिमल की मदद से शनिवार को दो कछुआ तस्करों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 33 प्रतिबंधित कछुए बरामद किए हैं। दोनों आरोपी इंडियन टेंट टर्टल प्रजाति के कछुओं को गढ़ गंगा व चंबल नदी से पकड़कर अवैध रूप से बेचने का काम करते थे। एक कछुए की कीमत दो हजार रुपये बताई गई है।
पीपल्स फॉर एनिमल (पीएफए) के वेलफेयर ऑफिसर गौरव गुप्ता ने बताया कि उन्हें काफी समय से सूचना मिल रही थी कि ग्रेटर नोएडा और आसपास के इलाकों में कछुओं की तस्करी की जा रही है। उन्होंने पुलिस के साथ मिलकर एक ट्रैप योजना बनाई। उन्होंने दिल्ली में जामा मस्जिद के पास रहने वाले एक व्यक्ति हाजी नावेद से संपर्क कर 100 कछुओं की डील तय की। बातचीत के दौरान नावेद ने कछुओं की तस्करी करने वाले रिंकू का नंबर साझा किया। इसके बाद गौरव ने खुद को ग्राहक बताते हुए रिंकू से संपर्क किया। शनिवार दोपहर को रिंकू अपने साथी सोनू के साथ एच्छर क्षेत्र के नट मडैया के पास कछुओं की डिलीवरी देने के लिए पहुंचा। जैसे ही उन्होंने कछुए सौंपने की कोशिश की तो मौके पर मौजूद पुलिस टीम ने दोनों को दबोच लिया।
आरोपियों के पास से 33 प्रतिबंधित कछुए बरामद हुए, जिन्हें सुरक्षित वन विभाग के हवाले कर दिया गया। गिरफ्तार आरोपियों में से एक का भाई दिल्ली में वन्य जीव तस्करी के एक मामले में गिरफ्तार हो चुका है। पुलिस अब इस गिरोह के नेटवर्क को खंगाल रही है। यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इनका संबंध किन-किन बड़े तस्करों से है और अब तक कितने कछुओं की तस्करी हो चुकी है। कोतवाली प्रभारी विनोद कुमार का कहना है कि दोनों आरोपियों के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। अदालत ने आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वहीं वांछित आरोपी की तलाश जारी है।
भारत, नेपाल और बांग्लादेश में पाई जाती है प्रजाति
इंडियन टेंट टर्टल यानी भारतीय तम्बू कछुआ (पंगशुरा टेन्टोरिया) जिओमीडीडे परिवार में कछुए की एक प्रजाति है। यह प्रजाति भारत, नेपाल और बांग्लादेश में पाई जाती है। जानकारी के अनुसार, नर्मदा नदी में अवैध रेत खनन और तस्करी के चलते इसमें पाए जाने वाले इंडियन टेंट टर्टल विलुप्त होने की कगार पर हैं। इनके ऊपर मंडराते खतरे को देखते हुए इन्हें शेड्यूल-वन में रखा गया है। यह कछुए काई और शैवाल आदि खाकर जीवित रहते हैं। पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाते हैं। इन कछुओं का उपयोग तंत्र मंत्र के साथ यौन शक्ति बढ़ाने में होता है। जानकारों के मुताबिक, इन कछुओं की चिप्स से बनने वाले सूप के इस्तेमाल से शारीरिक क्षमता में इजाफा होता है, इसलिए कछुए की चिप्स का सूप विदेश में काफी महंगा बिकता है।
कछुओं की कराई गई मेडिकल जांच
कछुओं को वन विभाग की निगरानी में सुरक्षित रखा गया है। विभाग का कहना है कि कछुओं को जल्द प्राकृतिक आवास में छोड़ने की प्रक्रिया की जाएगी। कछुओं की पशु चिकित्सालय डासना में मेडिकल जांच भी कराई गई है।