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Noida News: मोबाइल चोरी की 250 वारदात को अंजाम देने वाले दो बदमाश गिरफ्तार

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ज्यादातर साप्ताहिक बाजारों में भीड़ का फायदा उठाते थे, 51 मोबाइल व स्कूटी बरामद
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आईफोन को 15 हजार में, जबकि अन्य मोबाइल को चार से नौ हजार रुपये में बेचते थे

माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। मोबाइल चोरी की 250 वारदात को अंजाम देने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए फेज 2 थाने की पुलिस ने सरगना और उसके एक साथी को शनिवार को दबोच लिया। आरोपी ज्यादातर साप्ताहिक बाजारों में भीड़ का फायदा उठाकर मोबाइल चोरी करते थे। वहीं स्कूटी पर सवार होकर राह चलते लोगों का मोबाइल फोन भी छीन लेते थे। इनके पास से चोरी और लूट के 51 मोबाइल पुलिस ने बरामद किए हैं। साथ ही वारदात में इस्तेमाल की जाने वाली स्कूटी भी बरामद की है। दोनों आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी है।
बता दें कि जब चोरी और लूट के 50 से सौ मोबाइल एकत्र हो जाते तो आरोपी शाहजहांपुर, अलीगढ़ और दिल्ली-एनसीआर में मजबूरी बताकर राहगीरों को बेहद कम दाम में बेच देते थे। जो मोबाइल नहीं बिकते, उन्हें दिल्ली के बाजारों में बेच देते। पकड़े जाने के डर से अपना ठिकाना लगातार बदलते रहते थे। आरोपी व्हाॅट्सएप कॉल का प्रयोग करते थे, ताकि पुलिस इनको ट्रैक न कर सके। आरोपियों की पहचान शाहजहांपुर के कांठ निवासी मयंक सिंह और अलीगढ़ के अकराबाद निवासी नजरुल के रूप में हुई।
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22 वर्षीय मयंक और 19 वर्षीय नजरुल वर्तमान में भंगेल गांव में किराये पर रह रहे थे। मयंक गिरोह का सरगना है। इसके खिलाफ गाजियाबाद और नोएडा के कई थानों में तीन, जबकि नजरुल पर दो केस दर्ज हैं। अन्य राज्यों और जिलों की पुलिस से भी दोनों का आपराधिक इतिहास साझा करने को कहा गया है। आरोपियों ने अब तक चोरी और लूट की करीब 250 वारदात की हैं। आरोपियों के पास जो बैग मिला, जब उसकी तलाशी ली गई तो उसमें चोरी और लूट के 51 मोबाइल मिले।
एसीपी हेमंत उपाध्याय ने बताया कि सरगना मयंक ने बारहवीं तक की पढ़ाई की है। उसका साथी नजरुल
चौथी पास है। गिरफ्तारी के वक्त आरोपी मोबाइल दिल्ली के बाजारों में बेचने के लिए जा रहे थे। गिरोह में शामिल अन्य बदमाशाें के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस का कहना है कि अन्य के बारे में जानकारी मिलने के बाद गिरोह के सरगना और उसके साथियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई करने की योजना है।




रुकने का इशारा करने पर भाग रहे थे
एडिशनल डीसीपी ह्द्रेश कठेरिया ने बताया कि साप्ताहिक बाजारों और मंडियों में मोबाइल चोरी होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही थीं। चोरी की वारदात करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करने के लिए एसीपी हेमंत उपाध्याय की अगुवाई में एक पुलिस टीम गठित की गई। टीम शनिवार को थानाक्षेत्र स्थित श्मशान वाली सड़क पर बने नाले के पास चेकिंग कर रही थी, तभी स्कूटी से दो युवक गुजरे। संदिग्ध लगने पर पुलिस ने जब दोनों को रुकने का इशारा किया तो वे तेजी से भागने लगे। पुलिस टीम ने पीछा कर दोनों को दबोच लिया और कड़ाई से पूछताछ करनी शुरू कर दी। पूछताछ के दौरान पता चला कि स्कूटी सवार युवक शातिर किस्म के मोबाइल चोर और लुटेरे हैं।



सभी का काम निर्धारित
गिरोह के बदमाशों का काम बंटा होता है, जो व्यक्ति मोबाइल चुराता है वह तुरंत इसे अपने दूसरे साथी को पकड़ा देता। दूसरा साथी स्कूटी पर बैठे तीसरे साथी को मोबाइल दे देता और वह स्कूटी लेकर तुरंत वहां से चला जाता। ऐसे में शक होने पर अगर पहले व्यक्ति की तलाशी भी होती तो उसके पास से कोई मोबाइल नहीं मिलता।
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दुकानदारों के बारे में भी जानकारी जुटा रही पुलिस
चोरी और लूट के मोबाइल खरीदने वाले दुकानदारों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस का कहना है कि दुकानदारों का अगर सीधा संबंध इनसे निकला तो उन्हें भी आरोपी बनाया जाएगा। आईफोन को आरोपी 15 हजार में, जबकि अन्य मोबाइल को चार से नौ हजार रुपये में बेचते थे।
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