नोएडा में शनिवार को सेक्टर 6 स्थित एसपी सिटी कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में डायल 100 के बार?
नोएडा। सोमवार से आपको एफआईआर दर्ज कराने के लिए थानाें के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। स्ट्रीट क्राइम और चोरी की घटना के बाद आप जैसे ही 100 नंबर पर फोन करेंगे तो पीआरवी आपके पास पहुंचेगी। पीआरवी सवार पुलिसकर्मी मौके पर ही आपकी एफआईआर दर्ज करेंगे। इसे डायल एफआईआर का नाम दिया गया है। वहीं, अब साइबर क्राइम पीड़ितों को थाने व साइबर सेल के चक्कर नहीं काटने होंगे। इसके लिए शहर में कोतवाली सेक्टर-24 और देहात में सूरजपुर को नोडल थाना बनाया गया है। दोनों थाने में साइबर अपराध के मुकदमे दर्ज होंगे।
एसएसपी वैभव कृष्ण ने बताया कि 1 जुलाई से डायल एफआईआर शुरू की जा रही है। इसमें घरों में चोरी, स्ट्रीट क्राइम जैसे मोबाइल, पर्स, स्नेचिंग और कार का शीशा तोड़कर चोरी की घटनाओं में मौके पर ही एफआईआर होगी। इन घटनाओं के पीड़ित की सूचना पर जैसे ही यूपी 100 की पीआरवी मौके पर पहुंचेगी। उसी वक्त यूपी 100 की टीम ही मौके पर ही प्रोफार्मा में घटना का विवरण भर लेगी। उसी आधार पर कोतवाली में एफआईआर दर्ज हो जाएगी। अब पीड़ितों को कोतवाली जाने की जरूरत ही नहीं होगी। यूपी 100 को जितनी शिकायत मिल रही थीं। उतनी रिपोर्ट थानों में दर्ज नहीं हो रही है। अब घटनाओं के बाद 100 फीसदी एफआईआर होगी। इस कारण ही डायल एफआईआर योजना तैयार की गई। एसएसपी ने बताया कि डायल एफआईआर में कोई नामजद आरोपी नहीं होगा। नामजद आरोप के लिए वादी को थाने जाना होगा।
साइबर क्राइम के लिए दो थाने बने नोडल थाना
जनपद में बढ़ते साइबर क्राइम को देखते हुए एसएसपी ने दो थानों को नोडल थाना बनाया है। 1 जुलाई से शहर में कोतवाली सेक्टर-24 व देहात में सूरजपुर थाने में साइबर क्राइम के हर तरह के मुकदमे दर्ज किए जाएंगे। इसके बाद इनकी जांच संबंधित पुलिस के पास भेजी जाएगी। इससे पीड़ितों को थाने, साइबर सेल के चक्कर नहीं लगाने हाेंगे। एसएसपी ने बताया कि जनपद में साइबर क्राइम में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। हम लोगों के पास यह शिकायतें लगातार आ रही थीं कि पीड़ितों की सुनवाई नहीं होती और उन्हें थानों के चक्कर काटने पड़ते थे। पीड़ितों की आसानी से सुनवाई हो और मुकदमा पंजीकृत हो। इसके लिए दो थानों को नोडल थाना बनाया गया है। इसके लिए दोनों कोतवाली में नोडल अधिकारी की नियुक्ति होगी। साइबर क्राइम की इतनी घटनाएं होती हैं कि घटनास्थल पर भी हमेशा असमंजस रहता है। इस कारण थाने की पुलिस घटनास्थल की बात कहकर पीड़ितों को टरका देते थे। इसके बाद पीड़ित साइबर सेल व अधिकारियों तक पहुंचते थे। अब इस समस्या को खत्म करने के लिए यह व्यवस्था की गई है। कोई भी पीड़ित इन दोनों थानों में जाकर नोडल अधिकारी से मिलेगा और जांच के बाद मुकदमा पंजीकृत कर लिया जाएगा।