ग्रेनो प्राधिकरण में तैनात रहे दो प्रबंधक निलंबित
लखनऊ/ग्रेटर नोएडा। आम्रपाली बिल्डर से वसूली में लापरवाही करने पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में तैनात रहे दो प्रबंधकों को शासन ने मंगलवार को निलंबित कर दिया है। मामले में आरोपी दो कर्मचारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। तीन को चार्जशीट दी गई है, जबकि उस समय तैनात रहे एसीईओ (अब सेवानिवृत्त) के खिलाफ भी कार्रवाई प्रस्तावित है।
आम्रपाली को ग्रेटर नोएडा वेस्ट में करीब 12 लाख वर्ग मीटर जमीन आवंटित की गई थी। बिल्डर ने एकाध किस्त ही समय पर दी। उसके बाद किस्त डिफॉल्ट होने लगी। नियमानुसार डिफॉल्ट होने पर उसकी लीज डीड मोर्टगेज आदि की परमिशन नहीं दी जाती है, लेकिन उस समय प्राधिकरण में तैनात रहे अधिकारी उसे परमिशन देते रहे। उस पर बकाया किस्त और ब्याज की रकम बढ़ती चली गई। वर्तमान समय में उस पर करीब 4400 करोड़ रुपये बकाया हो चुका है। वहीं, आम्रपाली के प्रोजेक्ट अटकने पर खरीदारों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए प्रोजेक्ट पूरा करने की जिम्मेदारी एनबीसीसी को दी। साथ ही प्राधिकरण के दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया। कोर्ट के आदेश पर शासन ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के नाम मांगे। इसकी जांच एसीईओ केके गुप्ता ने की और रिपोर्ट शासन को भेज दी। रिपोर्ट में आठ अधिकारियों व कर्मचारियों के नाम सामने आए, जिनमें तत्कालीन एसीईओ, दो प्रबंधक, पांच लिपिकों के नाम शामिल हैं। एसीईओ सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि दोनों प्रबंधकों का ग्रेटर नोएडा से दूसरे प्राधिकरणों में स्थानांतरण हो चुका है। लिपिक मनोज कुमार और कैलाश चंद्र पहले ही निलंबित हो चुके हैं। बाकी तीनों लिपिकों के खिलाफ चार्जशीट दी गई है। दो प्रबंधकों पर भी अब कार्रवाई कर दी गई है।