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Noida News: युवराज मेहता की मौत के मामले में दो आरोपियों को मिली जमानत

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- मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 25-25 हजार के मुचलके पर दी रिहाई, विदेश यात्रा से पहले कोर्ट से लेनी होगी अनुमति
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माई सिटी रिपोर्टर

ग्रेटर नोएडा। सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में शुक्रवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत में सुनवाई हुई। अदालत ने लोटस ग्रीन बिल्डर कंपनी के कर्मचारी रवि बंसल और सचिन करनवाल को 25-25 हजार रुपये के एक-एक जमानती व इतनी ही धनराशि के व्यक्तिगत बंधपत्र पर जमानत दे दी। इसके साथ ही न्यायालय ने कुछ शर्तें भी निर्धारित की हैं। जिसमें जांच में पूर्ण सहयोग करने और बिना न्यायालय की अनुमति के देश नहीं छोड़ने और विवेचना के दौरान साक्ष्यों से किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं करने की बात शामिल है। वहीं इसी मामले में एमजेड बिल्डर कंपनी के निदेशक अभय कुमार की रिमांड बढ़ाने के साथ जमानत याचिका पर 2 फरवरी को सुनवाई होगी।
इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने पिता राज कुमार मेहता की तहरीर पर एमजेड विजटाउन व लोटस ग्रीन बिल्डर कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज कर एमजेड बिल्डर कंपनी के निदेशक अभय कुमार के अलावा लोटस ग्रीन के कर्मचारी रवि बंसल और सचिन करनवाल को गिरफ्तार कर लिया था। आरोपियों के अधिवक्ता ने बताया कि शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत को अवगत कराया कि आरोपियों ने कोई अपराध नहीं किया। उन्हें झूठा फंसाया गया है। न्यायालय ने अभियोजन अधिकारी और बचाव पक्ष के अधिवक्ता के तर्कों को सुनने के बाद केस डायरी व अभिलेखों का अवलोकन किया।
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पुलिस नहीं साबित कर पाई आरोपियों की बिल्डर कंपनी में स्वामित्व की भूमिका
बृहस्पतिवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी के न्यायिक रिमांड को एक दिन के लिए स्वीकार करते हुए विवेचक को अंतिम अवसर प्रदान किया था। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आरोपियों की कंपनी में भूमिका, पद, शेयरहोल्डिंग और घटनास्थल से जुड़े भूखंड के स्वामित्व से संबंधित सभी तथ्यों की विस्तृत आख्या प्रस्तुत की जाए। अदालत ने विवेचक से यह रिपोर्ट मांगी थी कि आरोपी जिस कंपनी में कार्यरत हैं। उसमें वह किस पद पर थे और उनकी भूमिका क्या थी। इस मामले में पुलिस आरोपियों की बिल्डर कंपनी में सवामित्व की भूमिका साबित नहीं कर सकी।
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