Twin Towers Blast :चेतन दत्ता का कहना है कि वह 31 जुलाई से नोएडा में थे और ट्विन टावर ब्लास्ट प्रक्रिया से जुड़े हुए थे। एक सप्ताह से मां बीमार हैं, लेकिन मां व घरवालों ने नहीं बताया था। ब्लास्ट के दिन घर वाले चिंता में थे। जैसे ही मैंने बटन दबाया और ब्लास्ट हुआ तो मां ने फोन कर सबसे पहले पूछा कि बेटे कैसे हो।
‘ग्रीन ट्रिगर वाला डिवाइस (एक्सप्लोडर) क्रिकेट की उस गोल्डन बॉल की तरह है जिससे मैच में हैट्रिक लगाई गई है। गेंदबाज इस बॉल को पास रख लेता है, उसी तरह अब इस ऐतिहासिक एक्सप्लोडर को मैं घर पर रखूंगा। यह एक्सप्लोडर ऐतिहासिक है।
विज्ञापन
इसका इस्तेमाल अब दूसरे ब्लास्ट में नहीं किया जाएगा।’ यह बात ट्विन टावर को ध्वस्त करने के लिए ट्रिगर दबाने वाले ब्लास्टर चेतन दत्ता ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कही। 28 अगस्त को चेतन ने एक्सप्लोडर का ग्रीन बटन जैसे ही दबाया था, वैसे ही ट्विन टावर जमींदोज हो गया था।
चेतन ने बताया कि हथीन के अल्फा इंटरप्राइजेज से विस्फोटक मंगाए गए थे। यहीं से विस्फोट से चार दिन पहले ही एक्सप्लोडर उनके पास आया था। इसकी नॉब, ग्रीन स्विच, एलईडी लाइट, डायनेमो, वायर आदि को देखकर तैयार किया गया था। एडिफिस इंजीनियरिंग और दक्षिण अफ्रीकी साझेदार फर्म जेट डिमोलिशन की तरफ से ब्लास्ट का डिजाइन किया गया था। देश के नियमों के अनुसार, इस तरह के कंट्रोल्ड ब्लास्ट को केवल कोई भारतीय ही कर सकता है। इस कारण एक्सप्लोडर का बटन उन्होंने दबाया था। ब्यूरो
विज्ञापन
मां ने नहीं बताई बीमारी, पूछा- बेटे कैसे हो
चेतन दत्ता का कहना है कि वह 31 जुलाई से नोएडा में थे और ट्विन टावर ब्लास्ट प्रक्रिया से जुड़े हुए थे। एक सप्ताह से मां बीमार हैं, लेकिन मां व घरवालों ने नहीं बताया था। ब्लास्ट के दिन घर वाले चिंता में थे। जैसे ही मैंने बटन दबाया और ब्लास्ट हुआ तो मां ने फोन कर सबसे पहले पूछा कि बेटे कैसे हो। ब्लास्ट करने के बाद से वह मां के साथ हैं और अब उनकी तबीयत में भी सुधार हो रहा है।