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Noida News: कंपनियों के बाहर रखे ट्रांसफॉर्मर, पार्कों से हरियाली गायब

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संवाद ------    मुकेश गोयल         ।    अमर  उजाला
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एनपीसीएल और प्राधिकरण से औद्योगिक सेक्टर-4 के उद्यमी परेशान, मूलभूत सुविधाओं का अभाव
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। औद्योगिक सेक्टर साइट-4 के उद्यमी मूलभूत सुविधाओं से परेशान है। एनपीसीएल और उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) से यह क्षेत्र जुड़ा है। यहां कुछ हिस्सा इकोटेक-वन का भी है। उद्यमियों का कहना है कि कंपनियों के बाहर ट्रांसफॉर्मर रखे हैं। वे गलत जगह लगे हैं। पानी व सीवर लाइन नहीं है। पार्कों में हरियाली नहीं है। अब तो वहां कूड़ा फेंका जा रहा है और गाड़ियां खड़ी की जा रही हैं।
साइट-4 में आयोजित अमर उजाला संवाद में उद्यमियों ने अपनी समस्याएं रखीं। उन्होंने कहा कि वैसे तो साइट-4 में चार पार्क हैं लेकिन देखने पर केवल एक ही पार्क की तरह लगता है। सेक्टर में साफ-सफाई नहीं हो रही है। अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। सड़कों से निकलना भी मुश्किल हो गया है। सड़कों की हालत बदतर है। गहरे गड्ढे हो चुके हैं। पानी की लाइन नहीं है। सीवर भी कनेक्ट नहीं है।
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उद्यमियों का आरोप है कि सेक्टर में एनपीसीएल की लाइन है। यहां उद्योगों के बाहर गलत तरीके से ट्रांसफॉर्मर लगाए गए है। ट्रांसफॉर्मर दो कंपनियों की दीवार के बीच होना चाहिए लेकिन काफी जगह ट्रांसफॉर्मर गेट के पास लगे हैं। इस कारण वाहन कंपनियों के अंदर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। 50 किलोवॉट से ऊपर का कनेक्शन मांगते ही नियम बदल जाते है। 10 से 15 लाख रुपये खर्च कर उद्यमी को स्वयं ट्रांसफॉर्मर व बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना पड़ता है जबकि इसमें 100 किलोवॉट की छूट होनी चाहिए।
ईकोटेक वन के उद्यमियों का कहना है कि वर्षों से सेक्टर में सीवर और पानी की लाइन नहीं थी लेकिन पानी की बिल लगातार भेजा जा रहा है। अब छह माह पहले पानी व सीवर लाइन डाली है, लेकिन पानी का कनेक्शन अभी भी नहीं दिया। सीवर लाइन भी कनेक्ट नहीं है।
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पार्कों में अतिक्रमण है। झुग्गियां बन चुकी हैं। सड़कों की हालत बेहद खराब है। निकलना मुश्किल होता है। -दिनेश सिंह
एनपीसीएल से जुड़ी काफी समस्याएंं हैं। 100 किलोवॉट का कनेक्शन के लिए अलग अनुमति लेनी पड़ती है। -मुकेश गोयल
मेरी कंपनी के बाहर बिजली का ट्रांसफॉर्मर रखा है। इस कारण गाड़ियों को अंदर लाने में दिक्कत होती है। -बंटी अग्रवाल
सेक्टर में सीवर लाइन ही नहीं है। पानी का कनेक्शन भी नहीं दिया गया। हर साल बिल भी वसूला जा रहा है। -राजेश माथुर
सेक्टर में मालवाहक वाहनों के लिए पार्किंग ही नहीं है। जो जगह है, वहां पर वेडिंग जोन बनाए जा रहे हैं। -नरेंद्र सिंह
बिजली की समस्या ज्यादा है। 8 घंटे में से दो घंटे बिजली नहीं आती है। ट्रिपिंग से काम प्रभावित हो रहा। -वैभव कंवर

संवाद ------    मुकेश गोयल         ।    अमर  उजाला

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