ट्रैफिक, निर्माण की धूल बढ़ा रही हवा में ''''जहर''''
- यूपीपीसीबी ने अपने आकलन में बताया सबसे बड़ी वजह, विशेषज्ञ एजेंसी करेगी वैज्ञानिक अध्ययन
अतुल भारद्वाज/माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नोएडा की सड़कों पर दौड़ रहे 10 लाख से अधिक वाहन और जारी निर्माण कार्य शहर की हवा में प्रदूषण का जहर घोल रहे हैं। जगह-जगह मिट्टी और बिल्डिंग मेटेरियल के ढेर और वाहनों की आवाजाही की वजह से धूल रही है। नोएडा के ज्यादातर सेक्टरों में निर्माण कार्य जारी है। ग्रैप लागू होने के बाद भी कई सेक्टरों में सड़कों पर ही मिट्टी खोद कर छोड़ दी गई है। जिससे प्रदूषण बढ़ रहा है।
यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के आकलन के मुताबिक नोएडा में प्रदूषण फैलाने के लिए निर्माण कार्य और वाहनों को सबसे ज्यादा जिम्मेदार बताया गया है। अब यूपीपीसीबी विशेषज्ञ एजेंसी से इसका वैज्ञानिक रूप से भी अध्ययन कराने की तैयारी में है। यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी उत्सव शर्मा ने बताया कि एक अक्टूबर से ग्रैप-1 लागू होने के पहले से ही तकनीकी टीम ने सर्वे शुरू कर दिया था। इस दौरान अलग-अलग संस्थाओं पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इनमें से 70 फीसदी चालान निर्माण कार्य कर रहे बिल्डर या नोएडा प्राधिकरण के ठेकेदारों पर हुए हैं। इस पूरी कार्रवाई के आकलन में निर्माण कार्य और ट्रैफिक की वजह से प्रदूषण बढ़ने की बात सामने आई है।
इसके अब यूपीपीसीबी ने नोएडा प्राधिकरण संग मिलकर सख्ती शुरू की है। निर्माण साइट पर मिट्टी व बिल्डिंग मेटेरियल ढककर रखा जाना सुनिश्चित किया जा रहा है।। वहीं ट्रैफिक पुलिस को भी सड़कों पर जाम लगने से रोकने के लिए जरूरी इंतजाम करने के लिए कहा गया है। हालांकि हकीकत में हालात अभी नहीं सुधरे हैं। सेक्टर-18, सेक्टर-62, सेक्टर-52, सेक्टर-59 पर कमोबेश रोजाना ट्रैफिक जाम शाम के समय हो रहा है। सड़कों पर मिट्टी खुले में पड़ी हुई है और वाहनों के गुजरने के समय उड़कर हवा में घुल रही है।
मैकेनिकल स्वीपिंग पर उठे सवाल, अब होगा ऑडिट
सोशल एक्टिविस्ट अमित गुप्ता ने कहा कि ग्रैप लागू होने की वजह से नोएडा में मैकेनिकल स्वीपिंग सभी प्रमुख सड़कों की होनी है। जबकि, ऐसा नहीं होता। जहां मशीन से सफाई की जा रही है वहां भी पानी का छिड़काव नहीं किया जाता है। इससे मशीन धूल हवा में घुलने की वजह बनती है। अधिकारियों को सोशल मीडिया पर दिखाने और कागजी रिपोर्ट बनाने के लिए मैकेनिकल स्वीपिंग कराने से बचना चाहिए। प्रदूषण कम करना है तो सही मंशा से मैकेनिकल स्वीपिंग पूरे शहर में सुनिश्चित करानी होगी। वहीं यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी का कहना है कि मैकेनिकल स्वीपिंग का ऑडिट कराने लिए नोएडा प्राधिकरण को पत्र भेजा गया है।
करीब 10 लाख वाहन शहर में मौजूद
परिवहन विभाग के मुताबिक पूरे जिले में करीब 9.34 लाख वाहन पंजीकृत हैं। इनमें से करीब 60 फीसदी नोएडा शहर के हैं। वहीं 1.56 फीसदी वाहन ऐसे हैं जिनके प्रदूषण सर्टिफिकेट वैध नहीं हैं। वहीं करीब पांच लाख से अधिक वाहन कामकाज की वजह से या दिल्ली, गुरुग्राम जाने के लिए नोएडा से गुजरते हैं।
इनसेट-
जनरेटर भी बन रहे हवा के लिए मुश्किल
नोएडा में भले ही 24 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा हो। इसके उलट करीब दो से चार घंटे बिजली कटौती पूरे दिन में होती है। इससे उद्योगों और आवासीय सोसाइटी में पावर बैकअप के लिए डीजल जनरेटर चलते हैं। ग्रैप में इसके लिए बंदी का आदेश होने के बाद भी इसे ठीक से लागू नहीं किया जा सका है।