नारनौल। भावांतर के तहत बाजरे की खरीद शुरू हुए 16 दिन बीत चुके हैं लेकिन अभी तक सरकारी खरीद का आंकड़ा शून्य है। वहीं व्यापारी बाजरे की खरीद बहुत कम भाव पर कर रहे हैं।
किसानों ने बताया कि व्यापारियों द्वारा बोली लगाकर जे फार्म के तहत की जा रही खरीद का कोई मापदंड निर्धारित नहीं है। एक ही खेत में उगाई गई फसल को व्यापारी बोली लगाकर अलग-अलग दाम पर खरीद रहे हैं।
किसान एक दिन में केवल 40 क्विंटल बाजरे का गेट पास जारी करवा सकते हैं। ऐसे में जिस किसान की पैदावार 40 क्विंटल से ज्यादा वह किसान दो बार में बाजरा मंडी में लेकर आते हैं। किसानों ने बताया कि पहले बाजरा लाए थे तब व्यापारी द्वारा बोली लगाकर बाजरा 2 हजार से 2100 के बीच में खरीदा जा रहा था लेकिन अब जब दोबारा उसी खेत का व उसी गुणवत्ता का बाजरा मंडी लेकर आए तो बाजरा 1850 से 1900 के बीच खरीदा जा रहा है। इस कारण किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों ने बताया कि एक एकड़ क्षेत्र में बाजरे की फसल उगाने में बिजाई से लेकर कटाई तक का खर्च 11 से 13 हजार रुपये आया है लेकिन बारिश के कारण बाजरे की पैदावार व गुणवत्ता प्रभावित हुई है। एक एकड़ क्षेत्र में औसत पैदावार 5 से 6 क्विंटल ही रह गई है। वहीं व्यापारी केवल 1850 से 1900 रुपये के भाव पर बाजरा खरीद रहे।
इंसेट
54066 क्विंटल बाजरा व्यापारियों ने खरीदा
बाजरे की खरीद शुरू होने से अब तक 16 दिनों में नारनौल में 724, अटेली में 1899 और नांगल चौधरी में 35 गेट पास जारी किए गए हैं। वहीं नारनौल में 20423, अटेली में 52646 और नांगल चौधरी में 1176 क्विंटल बाजरे की आवक हुई है। व्यापारियों द्वारा जे फार्म के तहत नारनौल में 13806, अटेली में 39282 और 978 क्विंटल बाजरे की खरीद की गई है।
भावांतर के तहत खरीद की घोषणा से पहले व्यापारी बाजरा 2200 से 2250 रुपये के भाव से खरीद रहे थे। क्योंकि उस समय निर्धारित था कि बाजरे की सरकारी खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य 2775 रुपये के तहत होगी लेकिन अब सरकारी खरीद नहीं होने से व्यापारियों द्वारा लगातार बाजरे के भाव में कमी की जा रही है।-महिपाल, किसान, गांव खटौटी कलां
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बीते शनिवार को करीब 30 क्विंटल बाजरा मंडी लया था। बोली लगाकर बाजरा 2031 रुपये के भाव पर खरीदा गया था। चार दिन बाद बुधवार को उसी खेत का व उसी गुणवत्ता का करीब 15 क्विंटल बाजरा लेकर मंडी पहुंचा लेकिन व्यापारियों ने बोली लगाकर बाजरा केवल 1941 रुपये में खरीदा। -सुनील, किसान,गांव-बांस की ढाणी
वर्जन :
बाजरे की जांच नियमित की जा रही है लेकिन गुणवत्ता के तय मानक पूरे नहीं होने के कारण सरकारी खरीद नहीं की गई है। वहीं अगर किसान जे फार्म के तहत व्यापारियों को बाजरा बेचते हैं तो उन्हें भावांतर के तहत 575 रुपये मिलेंगे।
प्रवीण भारद्वाज, जिला प्रबंधक, नारनौल।