जिले के आज सैकड़ों किसान करेंगे दिल्ली कूच
पुन्हाना। मेवात क्षेत्र के किसान भी अब अन्य किसानों की राह पर चल पड़े हैं। जिले के सैकड़ों किसान मंगलवार को राजस्थान के जुरहेड़ा से ट्रैक्टर-ट्रॉली पर सवार होकर हरियाणा-राजस्थान सुनहेड़ा बॉर्डर होते हुए दिल्ली कूच करेंगे। अगर किसानों को हरियाणा सीमा में घुसने नहीं दिया गया तो सीमा पर ही अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने की चेतावनी दी। इस संबंध में मध्य प्रदेश, हरियाणा आदि जगहों से आए किसान नेताओं ने सुनहेड़ा बॉर्डर पर पत्रकारों को जानकारी दी। वहीं, उनका कहना है कि मेवात पुलिस के बिछौर थाना प्रभारी को इसकी सूचना दे दी गई है। मेवात के किसान नेता अब्दुल रशीद का कहना है कि मंगलवार को जिले के सैकड़ों किसान किसान दिल्ली जा रहे हैं। कूच को लेकर सभी तैयारियां कर ली गई हैं।
मध्यप्रदेश से आए किसान नेता सरदार बलविंदर सिंह, धर्मचंद डागर, जफर रूपडाका, चौधरी रमेश चंद पलवल और उत्तर प्रदेश से आए किसान नेता माजिद खान ने बताया कि केंद्र सरकार तीनों काले कानूनों को वापस नहीं ले रही है। दिल्ली के चारों ओर हजारों किसान धरने पर बैठे हैं, लेकिन दिल्ली के सबसे नजदीक मेवात के किसानों ने अब तक धरना शुरू नहीं किया था। मंगलवार को राजस्थान के जुरहेड़ा से मेवात के सैकड़ों किसान हरियाणा सीमा से होते हुए दिल्ली कूच करेंगे। अगर प्रशासन ने दिल्ली जाने से रोका तो मजबूर होकर दोनों राज्यों की सीमा पर ही धरना शुरू कर देंगे। उनका कहना है कि इस बारे में उन्होंने सरकार, प्रशासन, मीडिया, सीआईडी और बिछौर थाना प्रभारी को सूचित कर दिया है। किसानों ने कहा कि जब तक सरकार तीनों काले कृषि कानूनों को वापस नहीं ले लेती है, तब तक धरने जारी रहेंगे। किसानों की चेतावनी मिलने पर बिछौर थाना प्रभारी मामले का जायजा लेने सुनहेड़ा बॉर्डर पर पहुंचे।
किसानों की अनदेखी केंद्र सरकार को पड़ेगी महंगी
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष आजाद खान कंकर खेड़ी ने सोमवार को किसान संगठनों के आह्वान पर 26 जनवरी को दिल्ली जाने के लिए रेवासन, हिरमथला, छापड़ा, रोजका मेवा व बड़ेलाकी सहित अन्य गांवों में दौरा किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों की अनदेखी कर रही है, जोकि महंगी पड़ेगी। भाजपा के राज में किसानों का भला नहीं हो सकता। लगभग एक महीने से अधिक समय से किसान सर्दी में धरने पर बैठकर किसान कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। लेकिन, सरकार सुन नहीं रही है।