-कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी, कहा, मानसून से पहले जुताई फायदेमंद
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। पुरानी प्रक्रिया की खेती के तरीके के तहत ग्रीष्मकालीन जुलाई कम लागत में गुणवत्ता युक्त उत्पादन में सहायक है। इसलिए किसान अपने खेतों की जुताई मानसून आने से पहले कर ले। उससे आगामी फसल की पैदावार में सहयोग मिलेगा। इसको लेकर कृषि विभाग ने किसानों के लिए एडवाइडरी जारी की है।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि कृषि विधियां जैसे कतार में बुवाई, फसल चक्र, सहफसली खेती और विशेष रूप से ग्रीष्मकालीन जुताई कम लागत में गुणवत्तायुक्त उत्पादन लेने में सहायक हैं। इन विधियों को अपनाने से जल, वायु, मृदा तथा पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आती है। कीट एवं रोग नियंत्रण की आधुनिक तकनीक एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन में परंपरागत तरीकों को अपनाने पर बल दिया है।
उन्होेंने बताया कि रबी फसलों की कटाई के बाद खेतों की ग्रीष्मकालीन जुताई खरीफ फसलों की तैयारी लाभकारी होती है। जुताई मई-जून माह के दौरान मानसून आने से पहले की जाती है। ग्रीष्मकालीन जुताई से मिट्टी की संरचना में सुधार होता है। जलधारण क्षमता में वृद्धि होती है। जो फसलों के लिए अत्यंत उपयोगी है। खेत की कठोर परत को तोड़कर मिट्टी को जड़ों के विकास के लिए अनुकूल बनाया जाता है। पौधों की वृद्धि बेहतर होती है। खेत में उगे खरपतवार एवं फसल अवशेष मिट्टी में दबकर सड़ जाते हैं। मिट्टी में जीवांश की मात्रा बढ़ जाती है और उसकी उर्वरता में वृद्धि होती है।
मिट्टी में छिपे कीट जैसे दीमक, सफेद गिडार, कटुआ बीटल और मैगेट के अंडे, लार्वा व प्यूपा नष्ट हो जाते हैं। फसल में कीटों का प्रकोप कम होता है। मिट्टी में पाए जाने वाले हानिकारक जीवाणु गर्मी की गहरी जुताई से समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने जनपद के कृषकों से अपील कि वे आगामी खरीफ फसल की तैयारी के लिए ग्रीष्मकालीन जुताई को प्राथमिकता दें और पारंपरिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर बेहतर उत्पादन प्राप्त करें।