-समय पर बीमारी की पहचान और इलाज से बच्चे के मानसिक-शारीरिक विकास को प्रभावित होने से बचाया जा सकता है
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नवजात शिशुओं में जन्मजात थायराइड विकार (कॉन्जेनिटल हाइपोथायरायडिज्म) की समय पर पहचान नहीं होने से मस्तिष्क और शारीरिक विकास प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती दिनों में इसके लक्षण चेहरे या व्यवहार से पहचानना मुश्किल होता है। करीब डेढ़ महीने बाद लक्षण दिखाई देने तक मस्तिष्क के विकास का महत्वपूर्ण समय निकल सकता है।
सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड पीजीआई के नियोनेटोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रुचि रॉय ने बताया कि औसतन 1000 नवजात में एक में यह विकार पाया जाता है। चाइल्ड पीजीआई में हर महीने ऐसे मामले सामने आते हैं। उन्होंने बताया कि यह समस्या मां के खान-पान या रहन-सहन के कारण नहीं, बल्कि बच्चे की थायराइड ग्रंथि से जुड़ी जन्मजात स्थिति के कारण होती है।
एड़ी से खून की बूंद लेकर जांच
सेक्टर-128 स्थित मैक्स अस्पताल के पीडियाट्रिक्स एवं नियोनेटोलॉजी विभाग के प्रिंसिपल कंसलटेंट डॉ. देवेंद्र छौंकर ने बताया कि जन्म के 48 से 72 घंटे के भीतर शिशु की एड़ी से खून की बूंद लेकर न्यूबॉर्न स्क्रीनिंग की जाती है। देश में करीब 0.03 प्रतिशत नवजात इससे प्रभावित बताए जाते हैं। थायराइड ग्रंथि के पूरी तरह विकसित न होने, अनुपस्थित होने या पर्याप्त हार्मोन न बनाने से यह समस्या हो सकती है। समय पर पहचान होने पर डॉक्टर की सलाह से थायराइड हार्मोन की दवा शुरू की जाती है, जिससे बच्चा सामान्य जीवन जी सकता है। उपचार कई मामलों में लंबे समय तक जारी रहता है।
विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञों ने अस्पताल से छुट्टी से पहले, जन्म के 48 से 72 घंटे के भीतर नवजात की न्यूबॉर्न स्क्रीनिंग कराने की सलाह दी है। समय पर उपचार शुरू होने से बीमारी के कारण होने वाली विकास संबंधी गंभीर जटिलताओं से बचाव संभव है।
इन लक्षणों पर दें ध्यान
- बच्चा लगातार सुस्त रहे या ठीक से स्तनपान न करे।
- मांसपेशियों में असामान्य ढीलापन दिखे।
- मुस्कुराने या विकास संबंधी गतिविधियों में देरी हो।
- रोने की आवाज भारी या बदली हुई लगे।
- लगातार कब्ज की समस्या हो।