मलबा फेंकने वालों पर होगी सख्ती
अवैध रूप से सी एंड डी कचरा डंप करते हुए पकड़े गए व्यक्तियों पर एक हजार का जुर्माना लगाया जाएगा। गैर-आवासीय और व्यावसायिक निर्माण में ऐसा पाए जाने पर दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। निर्माण स्थलों का संचालन करने वाले बिल्डरों और डेवलपर्स के लिए किसी भी उल्लंघन के लिए जुर्माना 25 हजार रुपये होगा। जुर्माने के खिलाफ प्राधिकरण और कार्यदायी संस्था दोनों कार्रवाई करेगी। इसमें जुर्माने की 70 फीसदी धनराशि एजेंसी के पास होगी और 30 फीसदी ग्रेनो प्राधिकरण के खाते में जाएगी। प्रवर्तन दल सी एंड डी अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 के अनुपालन की भी निगरानी करेगा।
पांच टन से कम कचरा उत्पादकों को संयंत्र पर पहुंचाना होगा
पांच टन से कम सी एंड डी वेस्ट उत्पादकों को अपने वाहनों से संग्रह बिंदुओं तक ले जाने का विकल्प होगा। हालांकि, अपशिष्ट निकलने वाली जगह से परिवहन सेवाओं का उपयोग और दरवाजे पर कचरे के संग्रह और प्रसंस्करण के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए प्रति टन 125 रुपये की अस्थायी राशि का प्रस्ताव है। पांच टन से अधिक कचरा उत्पादकों को अपने कचरे को संग्रह बिंदुओं पर डंप करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
पीपीपी मॉडल पर सात वर्ष के लिए होगा एजेंसी का चयन
नया संयंत्र अस्तौली गांव या प्राधिकरण की ओर से प्रस्तावित किसी अन्य जगह पर स्थापित होगा और पीपीपी मॉडल के तहत संचालित होगा। इस परियोजना के लिए सुविधा प्रदाता को सात वर्ष के लिए चयनित किया जाएगा। इसे दो बार चार-चार साल तक बढ़ाया जा सकता है, जिससे अधिकतम 15 साल की अवधि तक होगी। चयनित एजेंसी ग्रेटर नोएडा में सभी सी एंड डी कचरे को एकत्र करने, परिवहन और प्रसंस्करण के लिए जिम्मेदार होगा। इसमें वर्तमान में शहर में पड़े 70 हजार टन पुराने कचरे को साफ करने की भी जिम्मेदारी होगी। इसके अलावा कार्यदायी संस्था सड़कों के किनारे, जंक्शन बिंदुओं और प्राधिकरण अधिकारियों की ओर चिह्नित लावारिस कचरा उठाने का काम सौंपा जाएगा। इसमें संकरी गलियों, कॉलोनी की सड़कों और अन्य अनधिकृत डंपिंग भी शामिल होगा।
निर्माण और विध्वंस (सी एंड डी) अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने की योजना है। इसके बाद अवैध रूप से निर्माण सामग्रियों के कचरे को डंप करने वालों पर एक हजार रुपये से 25 हजार रुपये तक का जुर्माना भी लगाने की योजना है। -अभिषेक पाठक, ओएसडी, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण