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Greater Noida: ग्रेटर नोएडा में मलबा फेंकने पर 25 हजार तक लगेगा जुर्माना, इस योजना से मलबे का होगा निस्तारण

Wed, 29 Jan 2025 08:14 AM IST
विजय पुंडीर शशांक मिश्र, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा

सार

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से व्यावसायिक संचालन शुरू होने के बाद ग्रेटर नोएडा में शहरी विस्तार की सबसे ज्यादा संभावना है। ऐसे में आने वाले वर्षों में सी एंड डी कचरे का उत्पादन और बढ़ने की उम्मीद है। नया संयंत्र न केवल ताजा कचरे को ज्यादा सटीक तरीके से निस्तारित करेगा, बल्कि शहर में 70 हजार टन से ज्यादा निर्माण सामग्री के पुराने कचरे का भी निस्तारित होगा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण निर्माण और विध्वंस (सी एंड डी) अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने की योजना बना रहा है। इससे तेजी से हो रहे शहरी विस्तार में मलबे (निर्माण सामग्रियों के मलबे) के निस्तारण की समस्या का समाधान हो सकेगा। इस संयंत्र के जरिये प्रतिदिन 300 से 500 टन निर्माण सामग्रियों के अपशिष्ट का निस्तारण होगा। पीपीपी मॉडल पर योजना लागू होगी। इसके बाद अवैध रूप से मलबा फेंकने वालों पर एक हजार रुपये से 25 हजार रुपये तक का जुर्माना भी लगाने की योजना है।

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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से व्यावसायिक संचालन शुरू होने के बाद ग्रेटर नोएडा में शहरी विस्तार की सबसे ज्यादा संभावना है। ऐसे में आने वाले वर्षों में सी एंड डी कचरे का उत्पादन और बढ़ने की उम्मीद है। नया संयंत्र न केवल ताजा कचरे को ज्यादा सटीक तरीके से निस्तारित करेगा, बल्कि शहर में 70 हजार टन से ज्यादा निर्माण सामग्री के पुराने कचरे का भी निस्तारित होगा। दरअसल, ग्रेटर नोएडा के इकोटेक-3 में 100 टीपीडी की एक सी एंड डी अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधा है और इसे 300 टीपीडी तक बढ़ाया जा सकता है। शहर भर में छह अपशिष्ट संग्रहण प्वाइंट हैं।

मौजूदा एजेंसी वर्तमान में औसतन 150 टीपीडी तक ताजा सी एंड डी अपशिष्ट एकत्र और संसाधित कर रही है। 18.40 करोड़ की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना का उद्देश्य ग्रेटर नोएडा में ताजा और पुराने कचरे से उत्पन्न बढ़ती चुनौतियों से निपटना है। परियोजना शुरू होने के एक वर्ष के भीतर शहर में निर्माण सामग्रियों के एकत्र पुराने और अवैध कचरे के पूरे बैकलॉग को साफ किया जाएगा। इस अवधि के बाद इस परियोजना के लिए चयनित एजेंसी बिना किसी शुल्क के कचरे को एकत्र, परिवहन और संसाधित करेगी। 

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मलबा फेंकने वालों पर होगी सख्ती
अवैध रूप से सी एंड डी कचरा डंप करते हुए पकड़े गए व्यक्तियों पर एक हजार का जुर्माना लगाया जाएगा। गैर-आवासीय और व्यावसायिक निर्माण में ऐसा पाए जाने पर दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। निर्माण स्थलों का संचालन करने वाले बिल्डरों और डेवलपर्स के लिए किसी भी उल्लंघन के लिए जुर्माना 25 हजार रुपये होगा। जुर्माने के खिलाफ प्राधिकरण और कार्यदायी संस्था दोनों कार्रवाई करेगी। इसमें जुर्माने की 70 फीसदी धनराशि एजेंसी के पास होगी और 30 फीसदी ग्रेनो प्राधिकरण के खाते में   जाएगी। प्रवर्तन दल सी एंड डी अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 के अनुपालन की भी निगरानी करेगा। 

पांच टन से कम कचरा उत्पादकों को संयंत्र पर पहुंचाना होगा
पांच टन से कम सी एंड डी वेस्ट उत्पादकों को अपने वाहनों से संग्रह बिंदुओं तक ले जाने का विकल्प होगा। हालांकि, अपशिष्ट निकलने वाली जगह से परिवहन सेवाओं का उपयोग और दरवाजे पर कचरे के संग्रह और प्रसंस्करण के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए प्रति टन 125   रुपये की अस्थायी राशि का प्रस्ताव है। पांच टन से अधिक कचरा उत्पादकों को अपने कचरे को संग्रह बिंदुओं पर डंप करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। 
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पीपीपी मॉडल पर सात वर्ष के लिए होगा एजेंसी का चयन
नया संयंत्र अस्तौली गांव या प्राधिकरण की ओर से प्रस्तावित किसी अन्य जगह पर स्थापित होगा और पीपीपी मॉडल के तहत संचालित होगा। इस परियोजना के लिए सुविधा प्रदाता को सात वर्ष के लिए चयनित किया जाएगा। इसे दो बार चार-चार साल तक बढ़ाया जा सकता है, जिससे अधिकतम 15 साल की अवधि तक होगी। चयनित एजेंसी ग्रेटर नोएडा में सभी सी एंड डी कचरे को एकत्र करने, परिवहन और प्रसंस्करण के लिए जिम्मेदार होगा। इसमें वर्तमान में शहर में पड़े 70 हजार टन पुराने कचरे को साफ करने की भी जिम्मेदारी होगी। इसके अलावा कार्यदायी संस्था सड़कों के किनारे, जंक्शन बिंदुओं और प्राधिकरण अधिकारियों की ओर चिह्नित लावारिस कचरा उठाने का काम सौंपा जाएगा। इसमें संकरी गलियों, कॉलोनी की सड़कों और अन्य अनधिकृत डंपिंग भी शामिल होगा।

निर्माण और विध्वंस (सी एंड डी) अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने की योजना है। इसके बाद अवैध रूप से निर्माण सामग्रियों के कचरे को डंप करने वालों पर एक हजार रुपये से 25 हजार रुपये तक का जुर्माना भी लगाने की योजना है। -अभिषेक पाठक, ओएसडी, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण
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