आरोपी बेरोजगारों को फर्ज बेवसाइट बनाकर नामी बहुराष्ट्रीय कंपनियों में नौकरी दिलाने का लालच देते थे। वह नौकरी तलाश रहे युवाओं का डाटा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म (डार्क वेब आदि) के माध्यम से हासिल करते थे। इसके बाद उन लोगों से संपर्क कर उन्हें 5 से लाख रुपये प्रतिवर्ष की अच्छी सैलरी और आकर्षक पैकेज वाली नौकरी का भरोसा दिलाते थे। आरोपी नौकरी लगवाने के नाम पर वार्षिक पैकेज का 15 से 20 प्रतिशत तक रकम लेने की शर्त रखते थे। आरोपी पहले टोकन मनी के रूप में 40 हजार से 60 हजार रुपये तक की रकम एडवांस लेते थे। इसके बाद वह नामी कंपनियों की तर्ज पर फर्जी ई-मेल आईडी बनाकर अभ्यर्थियों को जॉब ऑफर लेटर भेज देते थे। इन ऑफर लेटर में कंपनी का लोगो, जॉइनिंग डेट और अन्य विवरण इस तरह से तैयार किया जाता था कि देखने में बिल्कुल असली लगे। अभ्यर्थियों को जब यह ऑफर लेटर मिलता था तो उन्हें नौकरी मिलने का भरोसा हो जाता था और वह शेष रकम भी आरोपियों द्वारा बताए गए खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर कर देते थे।
जब अभ्यर्थी संबंधित कंपनी में जाकर अपनी जॉइनिंग की जानकारी लेते थे तो उन्हें पता चलता था कि ऐसा कोई ऑफर जारी ही नहीं किया गया है। इस दौरान आरोपी पीड़ितों को तकनीकी समस्या या दस्तावेजों में त्रुटि का बहाना बनाकर कुछ समय तक गुमराह करते रहते थे। कई मामलों में वह किसी दूसरी कंपनी के नाम से नया फर्जी ऑफर लेटर भेजकर भी लोगों को भ्रमित करते थे। इस तरह आरोपी लगातार अलग-अलग लोगों को झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी कर चुके हैं। आरोपी कंप्यूटर सिस्टम की मदद से फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाते थे। इसके बरामद जॉब ऑफर लेटर में तीन अल्टांस कंपनी और तीन नॉर्थवेस्ट रिवेन्यू साइकिल मैनेजमेंट कंपनी के नाम पर तैयार किए गए थे।
30 से 60 हजार रुपये तक मासिक सैलरी दिलाने का देते थे झांसा
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वह पहले नौकरी तलाश रहे लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। इसके बाद उन्हें भरोसा दिलाते थे कि वे उन्हें किसी अच्छी कंपनी में 30 हजार से 60 हजार रुपये तक की मासिक सैलरी वाली नौकरी दिला सकते हैं। सौदा तय होने के बाद वे एडवांस राशि लेते थे और फिर फर्जी ऑफर लेटर जारी कर देते थे। आरोपी मोबाइल फोन के माध्यम से ही पीड़ितों से बातचीत करते थे और फोनपे, पेटीएम व गूगल पे जैसे डिजिटल माध्यमों से पैसे मंगाते थे। पुलिस अब इन मोबाइल फोन और बैंक खातों की जांच कर रही है। पुलिस ने आरोपियों द्वारा बनाई गई फर्जी बेवसाइट को बंद कराया है।
बीबीए पास सरगना कर चुका है विदेशी कंपनी में काम
गिरफ्तार मुख्य आरोपी विकास डाबर है। वह बीबीए पास है। आरोपी करीब एक साल पहले एक विदेशी हेल्थकेयर कंपनी में क्लेम सेटलमेंट का काम करता था। वहीं अरुण कुमार बीकॉम पास है। आरोपी विकास ने अरुण को साथ लेकर पहले काम शुरू किया था। वहीं वैभव कुमार बीएससी पास है। वैभव और अरुण कुमार ने भी पूर्व में निजी कंपनियों में काम किया है। इसी अनुभव का फायदा उठाकर वे नौकरी के नाम पर लोगों को ठगने का नेटवर्क चला रहे थे। गिरोह के सदस्य ज्यादातर मथुरा, बिजनौर, बागपत, हरियाणा के हिसार आदि के युवाओं को निशाना बनाते थे।