विशेषज्ञ बताते हैं कि दशहरे पर एक्यूआई पिछले सालों से बेहतर रहने का कारण मौसमी दशाएं हैं। इस बार बाहरी प्रदूषक दिल्ली नहीं पहुंच पा रहे हैं। हवा की रफ्तार इतनी धीमी है कि पड़ोसी राज्यों का असर दिल्ली पर नहीं पड़ा।
वहीं, दिल्ली में इस बार पुतले के साथ पटाखेबाजी भी नहीं हुई। दोनों का मिला-जुला असर प्रदूषण के स्तर में कमी के तौर पर रहा। इस महीने के नौ दिन में कभी भी वायु गुणवत्ता खराब स्तर पर नहीं गई।
मुख्यमंत्री ने दी बधाई
सभी रामलीला समितियों को दशहरे पर पटाखे कम जलाने के लिए तहेदिल से बधाई। समाज में कोई भी बदलाव लोगों के सहयोग के बिना संभव नहीं है। डेंगू और प्रदूषण दोनों को ही कम करने में हमें जो सफलता मिली है, वह सभी लोगों के सहयोग से ही संभव हुई है।- अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री
नोएडा में पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रदूषण को लेकर चलाई जा रही मुहिम का असर इस बार दशहरे के पर्व पर देखने को मिला। मंगलवार को शहर में दशहरा त्योहार मनाया गया। इस दौरान कुंभकरण, मेघनाद व रावण के पुतलों का दहन किया गया। वहीं, आतिशबाजी भी की गई। इसके बावजूद भी शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) विगत वर्ष की तुलना में काफी कम रिकार्ड किया गया। इस बार दशहरे के एक दिन बाद एक्यूआई 175 प्रतिशत रहा। वहीं, बीते साल यह 319 था। शाम होते होते इसमें और भी सुधार आया।
अधिकारियों ने बताया कि ग्रीन पटाखों व नियमों की अनदेखी नहीं करने से प्रदूषण स्तर नियंत्रण में रहा। हालांकि, आगामी दिनों में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान व उत्तर भारत में पराली जलाने से प्रदूषण का स्तर बढ़ सकता है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक विगत वर्ष दशहरे के एक दिन बाद एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी एक्यूआई 319 फीसदी रिकार्ड किया गया था।
वहीं, बुधवार को एक्यूआई का स्तर महज 175 प्रतिशत रिकार्ड किया गया। अधिकारियों ने बताया कि यह प्रदूषण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का ही असर है। बताया कि 8 अक्तूबर को यह आंकड़ा 114 प्रतिशत ही था। इसमें थोड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई। खास बात यह है कि दिन ढलने के साथ इसमें कमी भी देखी गई। बुधवार शाम चार बजे एक्यूआई का स्तर 144 प्रतिशत रिकार्ड किया गया।
इसमें पीएम-2.5 का स्तर 130, पीएम-10 का स्तर 144 प्रतिशत रिकार्ड की गई। वहीं, वातावरण में नाइट्रोजन ऑक्साइड (एनओटू) की मात्रा 17, सीओ 5 व ओजोन की मात्रा 48 प्रतिशत रिकार्ड की गई। बताया गया कि आगामी दिनों में प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि प्रदूषण का स्तर न बढ़े इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
साहिबाबाद में दशहरा पर मंगलवार को रावण के पुतले दहन के दौरान प्रदूषण का स्तर बढ़ गया। एक्यूआई रात करीब 11 बजे 300 माइक्रो प्रति घन मीटर के ऊपर पहुंच गया। कई घंटे बाद प्रदूषण स्तर में कमी आई। जब से मौसम में ठंडक बढ़नी शुरू हुई है, तब से प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी हो रही है।
गाजियाबाद में प्रदूषण मापने के लिए चार जगह वसुंधरा, इंदिरापुरम, संजय नगर और लोनी में मशीनें लगी हैं। इन मशीनों से मंगलवार को मिले आंकड़ों के अनुसार मंगलवार को रावण दहन से कुछ घंटे पहले जहां प्रदूषण का स्तर कम था वह रात 11 बजे करीब अचानक से बढ़ गया।
संजय नगर को छोड़कर सभी जगहों पर पीएम दस का स्तर कई गुना ज्यादा हो गया। इंदिरापुरम में पीएम दस का स्तर रात करीब 11 बजे 243 दर्ज किया गया। वसुंधरा में पीएम दस करीब 311 प्रति घन मीटर रहा, जबकि शाम सात बजे के करीब यह सामान्य स्थिति के पास रहा।
इंदिरापुरम में 112 था, जबकि वसुंधरा में पीएम दस 104 था। वहीं संजय नगर में पीएम दस में ज्यादा बढ़ोतरी देखने को नहीं मिली। रात करीब नौ बजे पीएम दस का अधिकतम स्तर 172 दर्ज किया गया।
लोनी में भी मंगलवार को दशहरा के दिन रात में प्रदूषण के स्तर में इजाफा हुआ। पीएम 10 का स्तर शाम करीब छह बजे 135 था जो कि बढ़कर रात करीब 294 तक जा पहुंचा। यहां पर बुधवार को भी प्रदूषण स्तर में कमी देखने को नहीं मिली।
सुबह नौ बजे करीब पीएम दस 353 तक जा पहुंचा। 12 बजे के बाद प्रदूण स्तर में कमी देखने को मिली। वहीं दिल्ली एनसीआर में लोनी सबसे प्रदूषित रहा। यहां पर एक्यूआई 196 रहा। जबकि गाजियाबाद में एक्यूआई- 168 दर्ज किया गया। जबकि नोएडा में एक्यूआई 170 और दिल्ली में 166 दर्ज किया गया।
पिछले वर्ष के मुकाबले कम रहा शहर का एक्यूआई
वर्ष 2018 में दशहरा के दिन शहर का एक्यूआई रेड जोन में था। इस दिन शहर का एक्यूआई- 314 दर्ज किया गया था, जो कि मानकों से करीब तीन गुना अधिक था। इस बार दशहरा पर प्रदूषण स्तर में पिछले वर्ष के मुकाबले कमी आई। शहर का एक्यूआई 175 के करीब दर्ज किया गया, जो कि मानकों से करीब डेढ़ गुना ही अधिक है। इस बार एक्यूआई येलो जोन में है।
बढ़ता प्रदूषण कर सकता है बीमार
प्रदूषण का स्तर बढ़ने से लोगों को बीमारियां घेर सकती है। हवा में जहरीली गैसें और नैनो पार्टिकल्स सांस के जरिये हमारे ब्लड तक पहुंच जाते हैं। इससे दिल की बीमारी, स्ट्रोक और अस्थमा अटैक आ सकता है। साथ ही सांस लेने में तकलीफ होना, आंखें लाल होना और खुजली के साथ जलन होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बार बार जुकाम होना, खांसी, साइनस, माइग्रेन, के साथ ही फेफड़ों में दिक्कत शुरू हो जाती है।