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Noida News: इस बार कानफोडू नहीं ग्रीन पटाखों से मनाइए दिवाली

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शहर के लंका मैदान में पटाखों की खरीदारी करते लोग। संवाद
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गाजीपुर। दिवाली पर इस बार रोशनी की लड़ियों के साथ ईको फ्रेंडली (ग्रीन) पटाखे की धूम है। पटाखा बाजार में दुकानदारों ने सामान्य पटाखों से लेकर ग्रीन पटाखों को भी सजा रखा है। लोग ग्रीन पटाखे भी खरीद रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि इस बार कानफोड़ू नहीं ग्रीन पटाखों से दिवाली मनाइए। इससे पर्यावरण प्रदूषित नहीं होगा। लंका मैदान में पटाखा बाजार लगाया गया है। पटाखा दुकानदार राजेश ने बताया कि हर साल तेज आवाज के पटाखों की मांग रहती है। सामान्य पटाखे जैसे अनार, चकरी, फुलझडी, चटाई आदि प्रमुख हैं। इस बार 15 शॉट की बजाय 16 शॉट का पटाखा बाजार में आया है, जो बहुत अच्छा है। ग्रीन पटाखे भी बाजार में आए हैं। नवकापुरा निवासी पूर्व सभासद व समाजसेवी संजय सिंह ने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा की जिम्मेदारी सभी पर है। दीपोत्सव की खुशियां पटाखा के बजाय मिठाई बांट कर मनाएं। कचहरी निवासी समाजसेवी वीरेंद्र सिंह बताते हैं कि दीपावली पर घरों में पकवान बनाएं, खुद खाएं और आने वालों को भी खिलाएं। पटाखों से लोगों को दूर रहने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि दीपावली पर पिछले दो साल से वह पटाखे जलाने के बजाय मिठाई बांटते हैं। गरीब परिवारों को कपड़े व मिठाई देकर उन्हें बेहद सुखद अनुभूति होती है। दीपोत्सव खुशियों का पर्व है। पटाखे पर्यावरण को दूषित करते हैं। इससे बचिए, पर्यावरण को भी प्रदूषित होने से बचाएं।
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ग्रीन पटाखों की वैरायटी-पटाखा बाजार में सिंगल लॉकेट, ऑटोमेटिक लॉकेट, स्काई शॉट, फ्लॉवर शॉट, डिसरो व्हील, क्रैगलिग स्टार, सिल्वर रेड, ग्रीन स्काईकल आदि ग्रीन पटाखे उपलब्ध हैं। इनकी कीमत 1000 से लेकर 2000 रुपये तक के बीच में है। दुकानदारों ने बताया कि नॉर्मल पटाखों में बारूद और अन्य ज्वलनशील रसायन होते हैं जो जलने के बाद प्रदूषण करते हैं। ग्रीन पटाखों में हानिकारक केमिकल नहीं होते। इससे वातावरण कम प्रदूषित होता है।
नुकसानदायक नहीं-दुकानदार राकेश ने बताया कि सामान्य के मुकाबले ग्रीन पटाखे 20 प्रतिशत तक महंगे हैं, लेकिन पर्यावरण के हित का ध्यान रखते हुए लोग ग्रीन पटाखों की मांग कर रहे हैं। इस बार परंपरागत कानफोडू पटाखों की बजाय ग्रीन पटाखों को बेचना अलग अनुभव रहता है। जानकारों का कहना है कि वायु प्रदूषण को देखते हुए साल 2018 में ग्रीन पटाखों का कांसेप्ट लाया गया था। इनमें एलुमिनियम, बेरियम, पोटेशियम नाइट्रेट और कार्बन जैसे खतरनाक केमिकल नहीं होते हैं।
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