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Noida News: लखनऊ की महापौर और नगर आयुक्त के बीच विवाद के पीछे की ये हैं मुख्य वजहें

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नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में महापौर, नगर आयुक्त एवं अन्य पार्षद।  - फोटो : संवाद
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लखनऊ। पुराने फैसलों पर अमल न किए जाने के आरोपों की वजह से शुक्रवार को नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में महापौर और नगर आयुक्त के बीच अधिकारों को लेकर ठन गई। हालात ये हो गए कि महापौर दो बार नाराज होकर बैठक छोड़कर जाने लगीं, हालांकि पार्षदों ने उनको समझाकर बैठाया। तब भी बैठक बेनतीजा रही। आखिर में बैठक स्थगित कर दी गई। अब 30 अक्तूबर को बैठक होगी। महापाैर और नगर आयुक्त के बीच विवाद के पीछे ये प्रमुख कारण हैं।

00 महापौर ने कहा कि पिछली कार्यकारिणी में यह प्रस्ताव पास हुआ था कि चौक चौराहे का नाम अमृत लाल नागर के नाम पर होगा। वहांं पर पट्टिका लगाई जाएगी, मगर अब तक नहीं लगाई गई। इस बीच उस चौराहे का नाम किसी ने शिवाजी के नाम पर करने की मांग की है। इससे विवाद हो रहा है। यदि पट्टिका लगी होती तो यह स्थिति न बनती। इस पर नगर आयुक्त ने कहा कि इसके लिए बजट कहां से आएगा। कार्यकारिणी इसके लिए कोई मद बनाए। महापौर ने कहा कि इसके लिए उनसे या पार्षद कोटे की मांग की जा सकती थी जो नहीं की गई।
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00 महापौर ने कहा कि पिछली कार्यकारिणी में पैनल अधिवक्ता नमित शर्मा की जगह शैलेंद्र सिंह चौहान को नियुक्त करने का प्रस्ताव पास किया गया था, लेकिन इस पर अमल नहीं किया गया। इसके अलावा नमित को तय फीस के अलावा लाखों रुपये का भुगतान किया गया। नगर आयुक्त ने कहा कि किस अधिवक्ता को लगाया जाए यह प्रशासनिक निर्णय है। नगर निगम प्रशासन अपनी आवश्यकता के अनुरूप अधिवक्ता को नामित करता है और उन्हें फीस देता है।

00 महापौर ने कहा कि पिछली कार्यकारिणी में सभी मृतक आश्रितों की नियुक्त करने का प्रस्ताव पास किया गया था, मगर अभी 31 मृतक आश्रितों की नियुक्ति लंबित है। जब जवाब मांगा गया तो नियुक्ति समिति की बैठक 28 अक्तूबर को लगाई गई।

00 महापौर ने कहा कि जो लोग नियमित रूप से गृहकर जमा कर रहे हैं उनको भी 2010 और 2014 से गृहकर के पुनरीक्षित बिल भेजे जा रहे हैं। यह गलत है। इस पर अधिकारियों ने कहा कि कार्यकारिणी एक समिति बना दे तो 2022 के बाद से पहले का किसी का गृहकर पुनरीक्षित नहीं किया जाएगा। यदि बिना समिति की सिफारिश किया जाएगा तो ऑडिट आपत्ति लगाएगी।

00 महापौर ने कहा कि मार्ग प्रकाश विभाग ने बिना अनुमति के पीएमसी नियुक्त की और ठेकेदारों से 70 लाख के टेंडर में 50 लाख हैसियत और 6 करोड़ के काम के लिए 30 लाख हैसियत मांगी है, जो गलत है।

00 महापौर ने कहा रैंबो ट्रस्ट नामक संस्था को झूलेलाल वाटिका आवंटन में देरी के लिए अपर नगर आयुक्त नम्रता सिंह से जवाब मांगा गया था। उन्होंने देरी के लिए पुलिस को जिम्मेदार बताया है। अब इस बारे में पुलिस आयुक्त को पत्र भेजा जाएगा। देरी से नगर निगम को करीब साढ़े तीन लाख रुपये आर्थिक नुकसान हुआ है।
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कार्यकारिणी के फैसलों पर यदि अफसर अमल नहीं करेंगे तो फिर बैठक बुलाने का क्या मतलब। पूरी कार्यकारिणी ही अपने पद से इस्तीफा दे देगी। कार्यकारिणी के अपने अधिकार हैं। अफसर इससे ऊपर नहीं हैं।

- सुषमा खर्कवाल, महापौर

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कार्यकारिणी और सदन का पूरा सम्मान है। अधिनियम में साफ है किसको क्या अधिकार मिले हैं। उसके तहत नियमानुसार काम किया जाएगा।

- गौरव कुमार, नगर आयुक्त

नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में महापौर, नगर आयुक्त एवं अन्य पार्षद। - फोटो : संवाद

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