मुआवजा घोटाले की जांच अब विजिलेंस करेगी
-सुप्रीम कोर्ट का आदेश, एसआईटी सौंप चुकी है रिपोर्ट, प्राथमिकी भी दर्ज करवा चुकी है
-117 करोड़ रुपये के मुआवजा घोटाले पर एसआईटी जांच में कई परतें खुलीं, तत्कालीन सीईओ से लेकर कर्मचारी घेरे में
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। गेझा तिलपताबाद समेत तीन गांव में मुआवजा वितरण में हुए घपले की जांच अब आगे यूपी विजिलेंस करेगी। विजिलेंस को तीन महीने में जांच पूरी करनी होगी। इसके पहले तीन बार एसआईटी जांच हो चुकी है। तीसरी बार बनी एसआईटी ने फेज-1 थाने में 6 प्राथमिकी भी दर्ज करवाई है। इनमें प्राधिकरण के तीन अधिकारियों के खिलाफ तो आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज हुआ है। सोमवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जांच विजिलेंस को सौंपे जाने का आदेश दिया। विजिलेंस एसआईटी की रिपोर्ट और दर्ज प्राथमिकी पर जांच आगे बढ़ाएगी। जांच के दायरे में तत्कालीन सीईओ से लेकर प्राधिकरण के कर्मचारी तक होंगे।
घपला गेझा तिलपताबाद, नंगला चरणदास, भूड़ा गांव से जुड़ा है। पहले दो बार हुई एसआईटी जांच में 117 करोड़ 56 लाख 95 हजार रुपये का घोटाला सामने आया है। 20 किसानों के खातों में कोर्ट से बाहर समझौते के नाम पर यह रकम डाली गई थी। पहली एसआईटी बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के चेयरमैन की अध्यक्षता में बनी थी, दूसरी एसआईटी तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की बनाई गई थी। तीसरी एसआईटी भी तीन आईपीएस अधिकारियों की बनी थी। कोर्ट पहले दो बार हुई एसआईटी की जांच से सहमत नहीं हुआ था। तीसरी बार गठित एसआईटी की जांच में घपला खुला था। जांच में 2009-10 से लेकर 2022-023 के बीच कोर्ट सेटलमेंट व अन्य सेटलमेंट के नाम पर 1186 प्रकरण में दिए गए मुआवजे की फाइलें कई बार खंगाली गई हैं।
2021 में सामने आया था फर्जीवाड़ा
नोएडा के गांवों में मुआवजा बांटने में गड़बड़ी खुलासा 2021 में गेझा तिलपताबाद गांव में हुआ था। अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश न्यायालय ने एक मामले में दिया था। फिर 2014-015 में प्राधिकरण के अफसरों ने उस आदेश का हवाला देकर यह लाभ अन्य किसानों को भी दे दिया। वर्ष 2021 में यह मामला उजागर होने के बाद जांच शुरू हुई तो अन्य मामले सामने आए। प्रकरण सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा फिर सुप्रीम कोर्ट ने 14 सितंबर 2023 को नोएडा प्राधिकरण व शासन को फटकार लगाते हुए कहा था कि यह गड़बड़ी सिर्फ विधि अधिकारी स्तर के नहीं कर सकती। इसकी विस्तृत जांच होनी चाहिए। कोर्ट की फटकार के बाद इस मामले में प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया था। वहीं प्राधिकरण स्तर पर तीन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ पूर्व में प्राधिकरण ने प्राथमिकी भी दर्ज करवाई थी।
अधिकारियों ने नकद में कमीशन लिया था
मुआवजा घोटाले की एसआईटी जांच में यह खुलासा हो चुका है कि घपले में किसानों को अधिक मुआवजा देने के बदले अधिकारियों ने दस प्रतिशत कमीशन नकद लिया था। जिसके लिए 160 किसानों के बयान भी एसआईटी ने दर्ज किए थे।