मेंहदावल में कथा कहते आचार्य धरणीधर महाराज
संतकबीरनगर। मेंहदावल उत्तर पट्टी कस्बे में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन आचार्य धरणीधर ने ने कहा कि जीवात्मा का परमात्मा से मिलन ही रास है। उन्होंने बताया कि मनुष्य के भीतर गुण और अवगुण दोनों होते हैं। जैसी संगति मिलती है, वैसा व्यक्तित्व प्रकट होता है। उन्होंने भक्ति को अवगुणों से दूर कर गुणों की ओर ले जाने वाली शक्ति बताया। अहंकार को मनुष्य के पतन का मूल कारण बताया। उन्होंने आत्मज्ञान और अहंकार त्याग का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि अहंकारी व्यक्ति सत्य से दूर हो जाता है और अपनी गलती स्वीकार नहीं करता, जो उसके विनाश का कारण बनता है।आचार्य धरणीधर जी ने कहा कि जहां अहंकार होता है, वहां नम्रता नहीं रह सकती, और नम्रता ही वह सेतु है जो मनुष्य को सफलता या ईश्वर के निकट पहुंचाती है। कथा व्यास ने श्रीमद्भागवत कथा के महत्व को बताते हुए कहा कि जो भक्त प्रेमी कृष्ण-रुक्मिणी के विवाह उत्सव में शामिल होते हैं उनके जीवन में मंगल होता है। जीव परमात्मा का अंश है। इसलिए जीव के अंदर अपार शक्ति रहती है। इस अवसर पर लालजी जायसवाल, श्याम लाल गुप्ता, संतोष जायसवाल, बलराम जायसवाल, विशाल जायसवाल, मनीष जायसवाल, उत्कर्ष, दीपेंद्र मिश्र, पवन जायसवाल, अमित, अंकित, नितिन, रोहन, डाॅ रोहन जायसवाल आदि मौजूद रहे।