लखीमपुर खीरी। लखनऊ-लखीमपुर मार्ग पर डग्गामार वाहनों पर लगाम कसने के लिए शासन स्तर से दो-दो अधिकारी जांच के लिए तैनात किए गए, लेकिन फिर भी उनका नेटवर्क पूरी तरह से तोड़ नहीं पाए। अफसरों का दावा है कि पहले की अपेक्षा इसमें कमी आई है।
शासन स्तर से कराई गई चेकिंग में लखीमपुर-लखनऊ मार्ग पर 98 डग्गामार वाहनों के संचालन होने की पुष्टि हुई थी, जिसमें प्रत्येक दिन पांच लाख रुपये का राजस्व नुकसान होना पाया गया था। प्रमुख सचिव परिवहन ने मामले में गंभीरता दिखाते हुए इस मार्ग पर नियमित जांच के लिए दो अफसरों की टीम उतारी थी। उनको अलग-अलग शिफ्टों में चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। टीमें उतारने के बाद भी डग्गामार वाहनों पर पूरी तरह लगाम नहीं लग सकी।
लखीमपुर डिपो की एआरएम गीता सिंह ने भी इसको माना है। उन्होंने कहा कि पहले डग्गामार बसें एलआरपी चौराहे पर ही खड़ी होती थीं। सख्ती के बाद बसें खड़ी तो नहीं होती, लेकिन उनका एक कर्मचारी चौराहे पर रहता है, जो सवारियों लखनऊ-सीतापुर ले जाने के लिए एकत्र करता है। बाद में बस आती है और सवारियों को लेकर चली जाती है।
अब भी रोजाना 10 से 15 डग्गामार बसें संचालित होती हैं। पहले की अपेक्षा निगम का कुछ राजस्व बढ़ा है, लेकिन जो होना चाहिए वह नहीं हो पा रहा है। इधर, प्रवर्तन अधिकारी डॉ. कौशलेंद्र ने लखनऊ-लखीमपुर मार्ग पर तीन डग्गामार बसों को सीज किया है।
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दिल्ली, आगरा व मथुरा के लिए चार एसी बसों के संचालन का प्रस्ताव
एआरएम इं. रमेश कुमार मंगलवार शाम करीब पांच बजे लखीमपुर डिपो पर पहुंचे। रोडवेज परिसर व पलटों का निरीक्षण कर बसों की स्थिति देखी। डिपो को मिलीं नई बसों से संबंधित जानकारी ली। ये भी पता किया कि बसों को किन-किन मार्गों पर लगाया गया है, उनसे कितनी आय हो रही है। निगम की बसों से आय कैसे बढ़ाई जाए समेत आदि बिंदुओं पर भी चर्चा की। साथ ही दिल्ली, आगरा व मथुरा के लिए चार एसी बसों के संचालन का भी प्रस्ताव रखा गया। उम्मीद है कि ये दिवाली से पहले संचालित होंगी। इधर, आरएम के निरीक्षण के दौरान एआरएम गीता सिंह, लखीमपुर डिपो प्रभारी सहदेव सिंह मौजूद रहे।
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