सीतापुर। महोली के नरनी गांव से ट्रैंकुलाइज कर पकड़ा गया बाघ सोमवार को कानपुर प्राणि उद्यान भेज दिया गया। 22 अगस्त से इस बाघ की दहशत महोली के नरनी में कायम बनी थी। करीब 45 दिन बाद डीएफओ नवीन खंडेलवाल व दुधवा के विशेषज्ञ इसे पकड़ने में सफल रहे। रविवार शाम पकड़े गए बाघ को देर शाम कानपुर के लिए रवाना किया गया।
डीएफओ नवीन खंडेलवाल ने बताया कि रविवार को इस बाघ को ट्रैंकुलाइज किया गया था। सोमवार देर शाम तक इलसिया स्थित वनचेतना पार्क में ट्रैक्टर ट्राली के ऊपर बने विशेष पिंजरे में बाघ को रखा गया। डीएफओ ने बताया कि बाघ को ट्रैंकुलाइज करने के लिए उप प्रभागीय वनाधिकारी बिसवां विकास कुमार यादव, उप प्रभागीय वनाधिकारी सीतापुर बृजेश पांडेय, दुधवा टाइगर रिजर्व के बॉयोलॉजिस्ट डॉ दयाशंकर और क्षेत्रीय वनाधिकारी कल्पेश्वर नाथ को नामित किया गया था।
बाघ लगातार नरनी, ब्रहृमावली, कटिघरा, श्यामजीरा, रघुवर दयालपुर पसिगवां व अन्य गांवों में विचरण कर रहा था। वनकर्मी लगातार उसके पग चिन्ह की जांच करते रहे। नरनी में स्थापित कमांड सेंटर से बाघ के मूवमेंट की लगातार निगरानी की गई।
शावकों को पकड़ने की उठी मांग
ग्रामीणों ने नरनी में बाघ व बाघिन पकड़े जाने के बाद अब जल्द से जल्द शावकों को पकड़ने की मांग तेज कर दी है। 22 अगस्त को नरनी के सौरभ दीक्षित को बाघ ने निवाला बनाया था। इसके बाद से ही बाघ को पकड़ने की कवायद जारी थी। इसी बीच 20 सितंबर को नरनी में एक बाघिन को पकड़ा गया। अब शावकों को पकड़ने की मांग उठी है।