डिसेंट अस्पताल से जुड़े फर्जी बीमा क्लेम प्रकरण में अब जांच का दायरा और व्यापक हो गया है। पुलिस को जांच में पता चला है कि बीमा क्लेम पास कराने में अस्पताल संचालकों के साथ 14 बीमा कंपनियों के ऑडिट अफसरों की भूमिका भी संदिग्ध है।
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इस जानकारी के बाद पुलिस ने सभी कंपनियों को ई-मेल भेजकर संबंधित अफसरों के नाम, पते और मोबाइल नंबर मांगे हैं। साथ ही दो टीमें संदिग्ध अस्पतालों के दस्तावेज खंगालने के लिए संतकबीरनगर और बस्ती रवाना हो गई हैं।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, विवेचक नितिन रघुनाथ ने बीमा कंपनियों से यह जानकारी मांगी है कि किन-किन ऑडिट अफसरों ने डिसेंट समेत जांच के दायरे में आए अस्पताल से जुड़े मरीजों के कैशलेस या रीइंबर्समेंट क्लेम को अप्रूव किया था।
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि अस्पताल प्रबंधन ने कई फर्जी भर्ती और इलाज के बिल बनाकर क्लेम फाइल की थी, जिन्हें बिना पर्याप्त सत्यापन के बीमा कंपनियों के ऑडिट अफसरों ने पास कर दिए।
पुलिस को शक है कि क्लेम पास करने में अस्पताल प्रबंधन और बीमा अफसरों के बीच आर्थिक लेनदेन या कमीशन का खेल हुआ है। कई क्लेम ऐसे हैं जिनमें एक ही मरीज के नाम पर अलग-अलग तारीखों में इलाज दिखाया गया या फिर इलाज के दौरान डॉक्टरों के हस्ताक्षर मेल नहीं खाते।
जांच टीम के अनुसार, डिसेंट अस्पताल के खिलाफ पहले से ही कई मरीजों ने फर्जी बीमा क्लेम और गलत बिलिंग की शिकायतें की हैं। इन शिकायतों के आधार पर पुलिस ने जब पुराने रिकॉर्ड खंगाले तो पाया कि कई क्लेम एक ही ऑडिट अफसर के पास से गुजरे हैं, जो अब संदिग्ध माने जा रहे हैं।
एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने बताया कि पुलिस की दो टीमें अब संतकबीरनगर और बस्ती में उन अस्पतालों के दस्तावेजों की जांच कर रही हैं, जहां से डिसेंट अस्पताल जैसी समान शिकायतें मिली हैं।
बीमा कंपनियों के ऑडिट अफसरों की भूमिका की जांच प्राथमिकता पर की जा रही है। जिन अधिकारियों ने बिना उचित जांच के क्लेम पास किए, उनकी जिम्मेदारी तय की जाएगी: अभिनव त्यागी, एसपी सिटी
यह है मामला
नौ सितंबर को बजाज आलियांज जनरल हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के अधिकारियों ने रामगढ़ताल थाना पुलिस को तहरीर दी थी। आरोप है कि डिसेंट और एपेक्स हॉस्पिटल के नाम पर फर्जी मरीज भर्ती दिखाकर इंश्योरेंस की करोड़ों की रकम निकाल ली गई।
जांच में सामने आया कि बीमाधारकों के नाम पर फर्जी दस्तावेज बनाए गए और फर्जी बैंक खाते खोलकर एक करोड़ 80 लाख 672 रुपये की ठगी की गई। खास बात यह रही कि एपेक्स नाम का हाॅस्पिटल तो शहर में अस्तित्व में ही नहीं है।
इन इंश्योरेंस कंपनियों से किया गया पत्राचार
बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी, एको हेल्थ इंश्योरेंस, चोलामंडलम इंश्योरेंस, गुड हेल्थ, एचडीएफसी एग्रो, हेल्थ इंडिया, आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस, मेडी, एसबीआई इंश्योरेंस, स्टेट हेल्थ समेत 14 इंश्योरेंस कंपनियों को मेल किया गया है।