हर संपत्ति की यूनिक आईडी व्यवस्था में प्राधिकरण व निबंधन विभाग को जोड़ा जाएगा, नामांतरण आसान होगा
-संपत्तियों की फर्जी दस्तावेजों पर रजिस्ट्री कराने की घटनाएं भी रुकेंगी, शासन स्तर से शुरू हुई तैयारी
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। प्रदेश में अब हर संपत्ति की एक यूनिक आईडी नंबर बनाए जाने की कवायद शुरू हो गई है। नोएडा प्राधिकरण से आवंटित सभी संपत्तियों की आईडी पहले से बनी हुई है। इसलिए प्राधिकरण और निबंधन विभाग को इस तैयारी में ऑनलाइन जोड़ा जाएगा। रिसेल में प्राधिकरण क्षेत्र की कोई भी संपत्ति खरीदने वाले को रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए प्राधिकरण दफ्तर के चक्कर नहीं काटने होंगे। निबंधन विभाग से होने वाली रजिस्ट्री का ब्योरा उसी समय ऑनलाइन प्राधिकरण में पहुंचेगा। इस तरह से नामांतरण की प्रक्रिया स्वचालित हो जाएगी। इसके साथ ही एक ही प्लॉट या फ्लैट की कई लोगों को रजिस्ट्री किए जाने जैसा फर्जीवाड़ा भी रुकेगा।
सोमवार को इस तैयारी को लेकर शासन स्तर से ऑनलाइन बैठक की गई। इस बैठक में प्राधिकरण अधिकारी भी जुड़े। व्यवस्था से खासतौर पर आवासीय प्लॉट और फ्लैट के खरीदारों को राहत मिलेगी। अभी रजिस्ट्री के बाद लोग स्वयं या वकीलों के माध्यम से रजिस्ट्री की प्रति और प्रार्थना पत्र प्राधिकरण में जमा करते हैं। तीन महीने के भीतर आवेदन न करने पर प्रतिदिन 50 रुपये जुर्माना भी लगता है। इस नई व्यवस्था के तहत प्रॉपर्टी आईडी के माध्यम से प्रॉपर्टी टैक्स रजिस्टर को रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा। सभी विभागों के साथ भी डेटा साझा किया जाएगा। संपत्तियों के अभिलेखों के प्रबंधन और सत्यापन को आसान बनाने के लिए हर संपत्ति की एक यूनिक प्रॉपर्टी आईडी बनाई जाएगी। प्राधिकरण से आवंटित संपत्तियों की आईडी पहले से ही बनी हुई है।
इस तैयारी को लेकर शासन स्तर से उप-सचिव संतोष कुमार की तरफ से नोएडा प्राधिकरण को पत्र भेजा गया है। इसमें तैयारियों संबंधी व बैठक से जुड़ी हुई जानकारी भी दी गई।
प्राधिकरण क्षेत्र के 81 गांव में व्यवस्था के लिए चुनौती
प्राधिकरण से आवंटित संपत्तियों का नामांतरण आसान है, लेकिन गांवों में यह प्रक्रिया जटिल है। गांवों की संपत्तियों की अभी कोई यूनिक आईडी नहीं बनी है। जमीन पर मालिकाना हक को लेकर गांव के लोगों और प्राधिकरण के बीच अक्सर विवाद होता रहता है। अधिकारियों का मानना है कि पहले मालिकाना हक तय होने के बाद ही उनकी यूनिक आईडी बन पाएगी। जो गांव औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के अंतर्गत नहीं आते, वहां लोगों को मालिकाना हक देने के लिए घरौनी बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यह प्रक्रिया गांवों में संपत्ति के अभिलेखों को व्यवस्थित करने में मदद करेगी। एक बार मालिकाना हक स्पष्ट होने पर यूनिक आईडी बनाना संभव होगा। फिर गांवों में भी नामांतरण की प्रक्रिया सुगम हो सकेगी। लेकिन मौजूदा स्थिति में आसान नहीं है।