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Noida News: जीवनभर की पूंजी से खरीदा था प्लॉट

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बरसाना/नंदगांव। बरसाना में रोप-वे के पास चाय की ठेल लगाकर अपना गुजर बसर करने वाली 65 वर्षीय मुनेश कुमारी ने दो वर्ष पहले जीवनभर की कमाई से टाउनशिप में प्लॉट खरीदा था, ताकि बुढ़ापे में बेटे के साथ चैन से रह सकें, लेकिन कॉलोनाइजर की कथित चाल और प्लॉट से जुड़ा विवाद उनकी जिंदगी पर ऐसा भारी पड़ा कि बुधवार को राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के निकट बेटे बलजीत सिंह के साथ जहर खाकर उन्हें अपनी पीड़ा शासन तक पहुंचाने की कोशिश करनी पड़ी।
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मूल रूप से पूर्वी दिल्ली की रहने वाली मुनेश कुमारी पिछले दो वर्षों से बरसाना में रह रही थीं और चाय बेचकर जीवन चला रही थीं। सन 2023 में उन्होंने फरीदाबाद निवासी बिल्डर नरेश कुमार शर्मा से केआरएस ग्रुप की राधारानी टाउनशिप में 144 गज का प्लॉट खरीदा था। बिल्डर ने खरीदते समय प्लॉट को मुख्य सड़क के नजदीक दिखाया गया था, जिसकी कीमत 28 लाख बताई जा रही है, जबकि रजिस्ट्री में दर्ज भूखंड की स्थिति दूसरी दिशा में निकली। प्लॉट को लेकर बढ़ते भ्रम और मकान खाली कराने के कथित दबाव ने महिला को मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित किया कि उनका धैर्य जवाब दे गया।
बुधवार सुबह मां-बेटे के लखनऊ में जहर खाने की सूचना मिलते ही बरसाना पुलिस सक्रिय हो गई। एसपी देहात सुरेश चंद रावत, सीओ गोवर्धन अनिल कुमार सिंह तथा थाना प्रभारी निरीक्षक संकेत गांव स्थित टाउनशिप पहुंचे और वहां लोगों से घटना की जानकारी ली। पूछताछ के लिए पुलिस ने हरी नारायण और पुष्पेंद्र त्यागी को थाने बुलाया।
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एसपी देहात सुरेश चंद रावत ने बताया कि जांच में अब तक 28 लाख रुपये दिए जाने संबंधी कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। जिस मकान में महिला रह रही थीं वह हरी नारायण के स्वामित्व में है। चार व पांच नवंबर को जनसुनवाई तथा सात नवंबर को डीजीपी कार्यालय में प्रार्थना पत्र भेजे जाने की बात कही गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
विवादों में रहा है केआरएस ग्रुप का नाम
विवादों से केआरएस ग्रुप का नाम पूर्व में भी जुड़ा रहा है। लोगों में चर्चा है कि वर्ष 2015 में नंदगांव के निकट पहली बार राधारानी टाउनशिप विकसित की गई, जिसके बाद संकेत और रिठौरा में भी कॉलोनियां काटी गईं। ग्रामीणों का आरोप है कि सत्ता पक्ष के सहयोग से संकेत में करीब साढ़े ग्यारह एकड़ तथा आजनौक में दो एकड़ ग्राम पंचायत की भूमि कॉलोनी में शामिल कर ली गई। इस संबंध में हाईकोर्ट में वाद भी दायर किया गया, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते ग्रामीणों को कोई राहत नहीं मिली।
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