लखनऊ। मेरो तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई... जाके सिर है मोरपखा मेरो पति सोई...। मीरा के पदों में ढली नृत्य नाटिका सोमवार शाम जब संगीत नाटक अकादमी के मंच पर उतरी तो श्रोताओं ने उनकी दीवानगी को अपनी तालियों की गूंज से उत्सव में बदल दिया। मौका था दो दिवसीय रंगलोक नाट्योत्सव के पहले दिन रंगलोक कथक केंद्र, लखनऊ की ओर से प्रस्तुत नृत्य नाटिका मीरा के मंचन का।
बालिका मीरा से श्रीकृष्ण भक्त मीरा बनने की ये कहानी भक्ति की निर्गुण और सगुण मिश्रित पद्धति की अद्भुत गाथा थी। नृत्य नाटिका की परिकल्पना एवं निर्देशन किया संगीत नाटक अकादमी अवॉर्डी डिंपी मिश्रा ने। मुख्य भूमिका में हर्षिता मिश्रा ने मीरा के चरित्र को अपने भावपूर्ण अभिनय, नृत्य और संवादों से जीवंत कर दिया। कृति राज ने छोटी मीरा के रूप में प्रभावशाली प्रस्तुति दी, जबकि अभिषेक गुप्ता सूत्रधार की भूमिका में पूरे मंच को जोड़े रहे।
संगीत संयोजन गजानन वर्मा का, नृत्य निर्देशन हर्षिता मिश्रा, प्रकाश परिकल्पना देवाशीष मिश्रा, मंच व्यवस्था अभिषेक सिंह और प्रद्दुम्न पांडेय की रही। बाबू बनारसी दास विश्वविद्यालय की चेयरपर्सन अल्का दास, समूह की उपाध्यक्ष सोनाक्षी दास, लविवि की प्रो. निशी पांडेय, अनिल रस्तोगी, रंगकर्मी सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ, गोपाल सिन्हा, सुशील कुमार सिंह तथा अनिल कुमार शुक्ल समेत शहर के तमाम बुद्धिजीवी, रंगकर्मी और कलाप्रेमी मौजूद रहे।
संगीत नाटक अकादमी के संत गाडगे प्रेक्षागृह में नृत्य नाटिका का मंचन करते कलाकार। -अमर उजाला
संगीत नाटक अकादमी के संत गाडगे प्रेक्षागृह में नृत्य नाटिका का मंचन करते कलाकार। -अमर उजाला
संगीत नाटक अकादमी के संत गाडगे प्रेक्षागृह में नृत्य नाटिका का मंचन करते कलाकार। -अमर उजाला
संगीत नाटक अकादमी के संत गाडगे प्रेक्षागृह में नृत्य नाटिका का मंचन करते कलाकार। -अमर उजाला
संगीत नाटक अकादमी के संत गाडगे प्रेक्षागृह में नृत्य नाटिका का मंचन करते कलाकार। -अमर उजाला