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Noida News: मोबाइल और लैपटॉप का बढ़ता इस्तेमाल बना अवसाद की वजह

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मोबाइल और लैपटॉप का बढ़ता इस्तेमाल बना अवसाद की वजह
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जिम्स के डॉक्टरों की सलाह, डिजिटल स्वच्छता अपनाना जरूरी, स्क्रीन टाइम कम करें



संवाद न्यूज एजेंसी

ग्रेटर नोएडा। आधुनिक जीवनशैली में डिजिटल उपकरणों का बढ़ता उपयोग अब मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालने लगा है। विशेषज्ञों के अनुसार अवसाद केवल जैविक या मनोवैज्ञानिक कारणों से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और डिजिटल व्यवहार से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।


मोबाइल और लैपटॉप स्क्रीन का अत्यधिक इस्तेमाल युवा और बच्चों में अवसाद के मामलों को बढ़ा रहे हैं। ग्रेटर नोएडा स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) के मनोरोग विभाग की ओपीडी में हर महीने करीब तीन से चार फीसदी मरीज मोबाइल व लैपटॉप स्क्रीन का अत्यधिक इस्तेमाल के कारण हुए अवसाद के पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार लंबे समय तक स्क्रीन पर रहने से न केवल आंखों और नींद पर असर पड़ता है, बल्कि यह मानसिक संतुलन को भी प्रभावित करता है। सोशल मीडिया का अधिक उपयोग लगातार ऑनलाइन रहने की आदत और वर्चुअल दुनिया में अधिक समय बिताना अकेलापन, चिंता और तनाव को बढ़ावा देता है, जो आगे चलकर अवसाद का रूप ले सकता है। जिम्स के मनोरोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. लेफ्टिनेंट कर्नल अभिषेक भारती ने बताया कि डिजिटल स्वच्छता (डिजिटल हाइजीन) को अपनाना आज के समय की जरूरत बन गया है। इसके तहत स्क्रीन टाइम को सीमित करना, सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल न करना और दिनचर्या में ऑफलाइन गतिविधियों को शामिल करना बेहद जरूरी है।
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डिजिटल उपकरणों का सीमित उपयोग ही बेहतर

डॉ. अभिषेक भारती ने कहा कि अभिभावकों को भी सतर्क रहने की जरूरत हैं। बच्चों के स्क्रीन उपयोग पर निगरानी रखना और उन्हें खेलकूद, पढ़ाई व सामाजिक गतिविधियों की ओर प्रेरित करना आवश्यक है। उनका कहना है कि यदि समय रहते डिजिटल आदतों में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले समय में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं। इससे बचाव के लिए मोबाइल व लैपटॉप को हर 20 मिनट पर 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर से देखें। यह आंखों के तनाव को कम करने में सहायक होगा व एकाग्रता बढ़ाएगा। इसलिए संतुलित जीवनशैली अपनाना और डिजिटल उपकरणों का सीमित उपयोग ही बेहतर मानसिक स्वास्थ्य की कुंजी है।
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