संतकबीरनगर। खलीलाबाद का बरदहिया बाजार पूर्वांचल के के साथ ही बिहार और नेपाल के गरीबों को ठंड से बचाता है। कपड़े के स्थानीय व्यापारियों को बड़ा बाजार मिल जाता है। प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से हजारों की संख्या में लोग यहां पर रोजगार से जुड़े हुए हैं।फिर भी यहां नागरिक सुविधाओं का अभाव है।
सस्ते और टिकाऊ वस्त्रों के लिए पूर्वांचल में प्रसिद्ध बरदहिया बाजार शुक्रवार की दोपहर से सजती है और रविवार की दोपहर में समाप्त होती है। कुल मिलाकर यह बाजार तीन दिन और दो रातों तक लगातार चलती रहती है।
पूरे बाजार में स्थानीय और बाहरी मिलाकर 5 हजार से अधिक व्यापारी हैं। यह व्यापारी लुधियाना, सीतापुर, पानीपत, मेरठ, अंबेडकरनगर के साथ ही कानपुर और दिल्ली की मंडियों से भी आते हैं और अपने माल बेचते हैं। बाजार में 40 रुपये का बाबा शूट मिल जाएगा तो 100 रुपये का ट्रैक शूट भी। यही नहीं महिलाओं के कार्डिगन, शाल, बच्चों के स्वेटर, ऊनी सलवार कमीज की रेंज 100 रुपये से शुरू हो जाती है।
यही नहीं ऊनी जैकेट की रेंज 200 से शुरु हो जाती है। पूरे दो किलोमीटर के दायरे में फुटपाथ पर खुले में लगने वाली इस बाजार में पूर्वांचल के सभी जनपदों के साथ ही नेपाल, बिहार और झारखंड तक के फुटकर दुकानदार आते हैं और जरूरी कपड़ों को लेकर जाते हैं।
स्थानीय बुनकरों को भी मिल जाता है बेहतर बाजार : जिले के स्थानीय बुनकरों को भी बरदहिया बाजार के चलते अच्छा रोजगार मिल जाता है। पूरे जिले के बुनकर यहां पर अपने कपड़ों को लेकर आते हैं तथा गमछा, धोती, चादर, तौलिया तथा अन्य सामान बेचते हैं। बाहर से आने वाले व्यापारी अपने ऊनी कपड़ों को बेचते हैं तथा जाते समय बुनकरों के बचे कपड़ों को खरीदकर लेकर चले जाते हैं तथा अपने यहां इन वस्त्रों को बेचते हैं।
चार महीने के लिए बुक हो जाते हैं क्षेत्र के कमरे : बरदहिया क्षेत्र में रहने वाले लोगों के कमरे चार महीने के लिए गोदाम के रुप में भारी कीमत देकर बुक कराए जाते हैं। बाहर से आने वाले व्यापारी अपने कपड़े लेकर आते हैं। जो कपड़े बाजार में नहीं बिकते हैं, उन कपड़ों को गोदामों में बंद करके चले जाते हैं। इस क्षेत्र में दूर - दूर तक कमरे किराए पर नहीं मिल पाते हैं। अधिकतर लोग अपने निजी कमरों को गोदाम के रूप में प्रयोग करते हैं।
बरदहिया बाजार में माल खरीदते हुए नेपाल के व्यापारी । संवाद
बरदहिया बाजार में माल खरीदते हुए नेपाल के व्यापारी । संवाद