हिसार। त्योहारी सीजन चल रहा है और मिठाई व अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों की पौ बारह हो रही है। उधर, खाद्य एवं सुरक्षा विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है। बीते चार दिन में जांच के नाम पर खानापूर्ति की गई है। कार्य क्षेत्र बड़ा होने और विभाग में कम स्टाफ के कारण जांच का जिम्मा स्वास्थ्य विभाग को दिया, लेकिन महज दो दिन ही सैंपल लिए। हालांकि इसी माह स्वास्थ्य और खाद्य एवं सुरक्षा विभाग (एफएसडी) ने जिले भर में 66 सैंपल लिए हैं, जिनमें से स्वास्थ्य विभाग ने आठ और एफएसडी ने 58 नमूने करनाल स्थित प्रयोगशाला में भेजे हैं।
एफएसडी के तहत खाद्य व्यवसाय संचालकों (एफबीओ) के लिए लाइसेंस/पंजीकरण और निर्धारित मानकों का पालन अनिवार्य है। दूरदराज के इलाकों में मौके पर जांच और जागरूकता के लिए एफएसएसएआई ने देशभर में 305 मोबाइल खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाएं (एमएफटीएल) शुरू की हैं। पहले सिर्फ एफएसडी ही सैंपल लेता था। कर्मचारियों की कमी और कार्य क्षेत्र बड़ा होने के कारण इसी माह एफएसडी ने स्वास्थ्य विभाग के चिकित्साधिकारियों को भी नमूने लेने का अधिकार दिया। डिप्टी सीएमओ (स्वास्थ्य) डॉ. अनिल आहूजा की टीम ने दो दिन में महज आठ नमूने लिए और कार्रवाई की इतिश्री कर ली।
मिलावटी मिठाई लेने से करें परहेज
मांग अधिक और आपूर्ति कम होने के कारण दिवाली पर मिलावटी मिठाइयां बड़े पैमाने पर तैयार की जा रही है। मिठाई का कारोबार न करने वाले भी मुनाफा कमाने के लिए हाथोहाथ हलवाई बैठाकर मिठाइयों के स्टॉल लगा रहे हैं। छैने व बेसन की अलग-अलग रंगों वाली मिठाइयां स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकती हैं। साथ ही दिन भर खुली पड़ी रहने से धूल से भर जाती है। सस्ते के लालच में ऐसी दुकानों से मिठाई खरीदने को चिकित्सक सही नहीं ठहराते। वहीं मावे से बनने वालीं मिठाइयां पहले ही तैयार कर स्टॉक कर ली जाती हैं। इस कारण मावा व मिठाई सड़ी हुई भी हो सकती है। देसी घी के नाम पर एसेंस वाला नकली घी इस्तेमाल किया जा सकता है। घी के नाम पर वनस्पति तेलों से बनीं मिठाइयां दी जा सकती हैं।