समालखा। सूर्य उपासना और महा आस्था का प्रतीक छठ महापर्व शनिवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया। इसको लेकर शहर में रह रहे बिहार, यूपी के लोगों द्वारा तैयारियां भी शुरू कर दी गई है। छठ पूजा के लिए ऑफिसर कॉलोनी में सूर्य नारायण नवग्रह मंदिर के पास तालाब तैयार किया जा रहा है, जहां पानी में खड़े होकर सूर्य उपासना की जाएगी। इसे षष्ठी मईया व्रत भी कहा जाता है।
नहाये पर ऐसे होती है शुरूआत-
सबसे पहले घर की सफाई कर उसे पवित्र किया जाता है। उसके बाद व्रती स्नान करते हैं और इसके उपरांत सात्विक भोजन बनाते व ग्रहण करते हैं। व्रती इस दिन सिर्फ एक बार ही खाना खाते है। खाना में कद्दू की सब्जी, मूंग चना दाल, चावल का उपयोग करते है। यह खाना चूल्हे पर बनाया जाता है और खाना पकाने के लिए आम की लकड़ी का प्रयोग किया जाता है। 26 अक्तूबर को खराना होगा। इसमें दिनभर निर्जल उपवास रखा जाता है। शाम को तारों की छांव में व्रती सात्विक भोजन ग्रहण करता है जिसमें सूखी रोटी और गुड़ वाली खीर शामिल होती है। छठ पर्व का तीसरा दिन संध्या अर्ध्य के नाम से जाना जाता है। 27 अक्तूबर को संध्या अर्ध्य पर पूरा दिन व रात व्रती कुछ नहीं खाते हैं। शाम को डूबते सूरज को अर्ध्य दिया जाता है। वहीं उससे अगले दिन उगत सूरज को अर्ध्य देने के साथ ही महा आस्था का पर्व पूर्ण हो जाता है।