टप्पल के गांवों से यमुना नदी का पानी उतरना शुरू हो गया है। बाढ़ ने बर्बादी के निशान भी छोड़ने शुरू कर दिए हैं। 572 एकड़ कृषि क्षेत्र की धान, बाजरा और मक्का की फसलेंं प्रभावित हुई हैं। गांव महारागगढ़ में नौ मकान और दीवारें गिरी हैं। करीब 18 मकानों में दरारें आई हैं। घरों में भरे पानी से घरेलू सामान को भी नुकसान हुआ है।
यमुना नदी के जलस्तर में लगातार दूसरे दिन भी कमी रहने से टप्पल के गांव महाराजगढ़, शेरपुर, मिर्जापुर, पखौदना, नगला अमर सिंह, नगला रामस्वरूप, रामगढ़ी, लालपुर, नगला चंडी, घरबरा, ऊंटासानी, धारा की गढ़ी में पानी उतरने लगा लगा है। बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित महाराजगढ़ में भी पानी कम हुआ है, जहां सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। यहां नौ मकान महेंद्र, रामेश्वर, प्यारेलाल, धर्मेंद्र, मुकेश, मनवीर, धर्मवीर पुत्र बंटा और मनवीर पुत्र रामन सहित नौ लोगों के गिरे हैं। ज्ञानी, रूपा, चंदर देवी सहित करीब 18 लोगों के मकानों में दरारें आईं हैं। तीन हजार बीघा से ज्यादा लोगों की फसलों को नुकसान हुआ है।
राहत सामग्री का वितरण जारी
प्रशासन द्वारा राहत सामग्री की किट का भी सोमवार को वितरण किया गया। गांव महाराजगढ़ में अब तक 99 प्रतिशत लोगों को राहत किट का वितरण किया जा चुका है। टप्पल स्थित बाढ़ राहत शिविर में 250 से ज्यादा लोग रह रहे हैं, जिन्हें भोजन आदि की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
राहत शिविर से शाम को घरों को लौटना जारी
राहत शिविर से शाम होते ही लोगों का गांव महाराजपुर में लौटने का सिलसिला अभी थमा नहीं है। 50-60 लोग शाम होते ही अपनी नावों से अपने-अपने गांवों को रवाना हो जाते हैं।
यमुना का पानी डेढ़ मीटर उतरा
एसडीएम खैर शिशिर कुमार सिंह ने बताया कि आठ सितंबर को डेढ़ मीटर पानी बाढ़ क्षेत्र में उतरा है, यमुना नदी का जलस्तर 198.9 रहा जो खतरे के निशान से काफी नीचे है, अगले दिन मंगलवार को लगभग दो मीटर और जलस्तर उतर जाएगा। उन्होंने बताया कि टप्पल बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में तीन मकान गिरने की सूचना मिली है, साथ ही एक दर्जन से अधिक मकान में दरार आने की सूचना है, 572 एकड़ कृषि भूमि में फसलों का नुकसान है, जनजीवन सामान्य हो जाने पर निरीक्षण कर प्रभावित लोगों को मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा, जिनके मकान में दरार हैं, उन्हें आंशिक रूप से मुआवजा दिया जाएगा।
आवासीय भूमि का किया जा चुका है आवंटन
प्रशासन द्वारा महाराजगंज के ग्रामीणों के लिए अलग क्षेत्र में आवासीय भूमि आवंटित की हुई है किंतु निजी कारण से ग्रामीण इस जगह को छोड़ना नहीं चाहते हैं। टप्पल में स्थित बाढ़ चौकी में आज 250 से अधिक लोगों ने दिन में खाना खाया साथ ही 150 से अधिक पशुओं को चार दिया गया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र टप्पल पर शिविर लगाकर आवश्यक दवा का वितरण भी किया गया।
बोली महिलाएं
घर में बाढ़ का पानी भरने से मकान बैठ गया है, दीवारों में दरार आ गई है। पांच दिन से दूसरों के घर में रहकर गुजारा कर रही हूं। चंदर देवी महाराजगढ़
शेरपुर गांव के पास 11 बीघा धान की फसल थी लेकिन बाढ़ के पानी में सब बर्बाद हो गया। पति बेंगलुरु में रहते हैं। योगी सरकार से आर्थिक मदद की उम्मीद है। बीना देवी लालपुर
शेरपुर के पास पांच बीघा धान की फसल खराब हो गई है। गांव से लोगों से उधार लेकर खेती में लगाए थे कि फसल होने पर चुका देंगे लेकिन सब बर्बाद हो गया। महादेवी लालपुर