अमवां घाट पर लगी ग्रामीणों की भीड़। स्रोत- ग्रामीण
- फोटो : शहर के कुड़वार नाका तिराहे पर जाम में फंसे लोग।
गाजीपुर/ करंडा। गंगा किनारे करंडा थाना क्षेत्र के श्रद्धालु कार्तिक माह में रोज स्नान करने गंगा घाट जाते हैं। एक सप्ताह से रामजनपुर निवासी बिंदा देवी अपनी बेटी रोली, भतीजी पूनम, पड़ोस की खुशी और अन्य के साथ स्नान करने जा रही थीं, लेकिन उसे क्या पता था कि उसकी आंखों के सामने ही बेटी, भतीजी और पड़ोस की किशोरी डूबकर मौत हो जाएगी। गंगा के लगातार घट रहे पानी से स्नानार्थियों को नदी की गहराई का अनुमान नहीं लग सका था और किनारे ही 10 से 20 फीट की गहराई में समा गईं। पूनम बीए, रोली इंटर और खुशी सातवीं की छात्रा थी। तीनों एक-दूसरे के साथ ही रहती थी। उधर, गंगा के लगातार घट रहे पानी से स्नानार्थियों को नदी की गहराई का अनुमान नहीं लग सका था और किनारे ही 10 से 20 फीट की गहराई में समा गईं। रामजनपुर गांव निवासी व डूबते-डूबते बची बिंदा देवी ने रोते हुए बताया कि रोज की तरह बेटी रोली, भतीजी पूनम, पड़ोस की खुशी, भोदू, सोन्हुला, अमवाडीह की प्रतिमा देवी और उनकी बेटी पायल स्नान करने अमवाघाट गई थीं। स्नान करते समय उन लोगों को नदी की गहराई का अंदाजा नहीं लग पाया। ऐसे में बिंदा देवी, उनकी पुत्री रोली, भतीजी पूनम, खुशी, प्रतिमा देवी, उनकी पुत्री पायल और सोन्हुला डूबने लगीं। बताया कि शोर मचाने पर पास में खेती कर रहे मल्लाह बलिराम चौधरी ने गंगा में छलांग लगा दी और मुझे, प्रतिमा देवी, पायल, सोन्हुला को तो बचा लिया, लेकिन रोली, पूनम और खुशी आंखों के सामने गंगा में समा गईं। यह कहकर बिंदा फफक कर रो पड़ी। उधर, मृतका पूनम की मां शांति देवी और पिता रामबचन यादव पुत्री का शव देख दहाड़े मारकर रोने-बिलखने लगे। पूनम सात भाई- बहनों में सबसे छोटी थी, लेकिन पढ़ने में काफी मेधावी थी। जबकि मृतका रोली चार बहनों में तीसरे नंबर पर थी। जबकि मृतका खुशी चार भाई बहनों में सबसे बड़ी थी।
पुत्री का शव देख मां इंदू देवी और पिता बबलू यादव रोते- रोते अचेत हो जा रहे थे। परिजनों की यह दशा देख गांव में कोहराम मचा हुआ था। ग्रामीण परिजनों को सांत्वना देने में जुटे हुए थे।