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बच्चियों का शव किया सुपुर्द-ए-खाक

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तावडू। गांव कांगरका में मंगलवार को चिकित्सकों की मेडिकल जांच के बाद गमगीन माहौल में मृतक बच्चियों को गांव के कब्रिस्तान में दफना दिया गया। इनमें दो सगी बहनें भी थीं। इस हृदय विदारक माहौल को देखकर सभी की आंखें नम थी। अंतिम संस्कार के दौरान हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे। घटना के बाद से ही पीड़ित परिजनों को सांत्वना देने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों, गणमान्य लोगों व नेताओं का भी तांता लगा रहा। मंगलवार को पूर्व मंत्री एवं नूंह विधायक भी आफताब अहमद भी गांव कांगरका में पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने कब्रिस्तान में मृतकों को श्रद्धांजलि दी तो वही घटनास्थल का भी दौरा किया और इसके बाद पीड़ित परिजनों को सांत्वना देते हुए पूरी घटना की विस्तार पूर्वक जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने कहा कि इस दुख की घड़ी में वह परिवार के साथ है। प्रशासनिक तौर पर जो भी उचित मदद होगी उसके लिए भी वह प्रयासरत हैं।
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बता दे कि सोमवार शाम गांव कांगरका निवासी वकीला (19) पुत्री शेर मोहमद, जनिस्ता (18) और उसकी बहन तस्लीमा (10) पुत्री जेकम, गुलअफशा (9) पुत्री हमीद, सोफिया (9) पुत्री जावेद मिट्टी लेने के लिए गईं थीं। सभी गांव के समीप जंगल में करीब 15 फीट ऊंचे टीले के नीचे से मिट्टी की खोदाई कर रही थीं। अचानक टीले का एक बड़ा हिस्सा उनके ऊपर गिर गया। सभी मिट्टी के नीचे दब गई। इनमें सोफिया का कुछ हिस्सा मिट्टी के नीचे दब गया। जिसने बचाव के लिए शोर मचाया। बच्चियों के मिट्टी के नीचे दबने की सूचना पर ग्रामीण टीले की तरफ दौड़ पड़े और मिट्टी को हटाने में लग गए। करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने चार बच्चियों को मिट्टी से बाहर निकाला, लेकिन तब तक इनकी मौत हो चुकी थी। मृतकों में वकीला सबसे बड़ी थी जिसका हाल ही में परिजनों ने रिश्ता तय किया था।
बारिश से कमजोर हो गया था टीला
बीते सप्ताह कई दिन हुई लगातार बारिश के कारण टीले में कटाव होने से टीला कमजोर हो गया था। युवती और बच्चियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। वह टीले की जड़ से मिट्टी खोदने लगी। अक्सर, यहां से महिलाएं अपने कच्चे आंगन व चूल्हा आदि की पुताई के लिए मिट्टी लाती हैं। सोमवार शाम को टीले के नीचे से कुछ ग्रामीण बच्चियां मिट्टी लेने को एक साथ गई थीं। ग्रामीणों ने बताया, पहले भी महिलाएं यहां से मिट्टी ले जाती रही हैं। इसलिए टीले के नीचे का काफी हिस्सा खाली हो गया था। उसी हिस्से में महिलाएं मिट्टी खोदने का कार्य कर रही थीं। जिसकी वजह से यह दरक गया और बच्चियों की दबने से मौत हो गई।
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और भी बड़ा हो सकता था हादसा
ग्रामीणों से मिली जानकारी के मुताबिक अक्सर बड़ी संख्या में गांव की महिलाएं और बच्चियां एक साथ इस पंचायती जगह से मिट्टी खोदने के लिए एक साथ जाती हैं, लेकिन सोमवार के दिन गांव में एक शादी समारोह था। जिसके कारण मिट्टी खोदने सिर्फ पांच लड़कियां गई थी। वरना यह हादसा और भी बड़ा हो सकता था।
क्षेत्र गांवों में अवैध रूप से होती है मिट्टी की खुदाई
तावडू उपमंडल के कई गांव में अवैध रूप से पंचायती जगहों और निजी भूमि से मिट्टी की खुदाई की जाती है। जहां-जहां भी मिट्टी खोदी गई है, उन सभी जगहों पर 10 से 20 फुट की गहरी खाइयां बनी हुई है। जिनमें हमेशा हादसा होने का अंदेशा बना रहता है। गांव निजामपुर, भाजलाका, चीला, छारोडा, गवारका, सिलखो, चिलावली, पचगांवा में भी पंचायती और निजी जगह से मिट्टी की खुदाई की गई है। इसके कारण यहां पर गहरे टीले बने हुए है। तावडू मोहम्मदपुर रोड पर गांव डिंगरहेड़ी में सरकारी स्कूल के पीछे बने तालाब में भी मिट्टी की गहरी खुदाई की हुई है। अक्सर स्कूली बच्चे तालाब के साथ बने रास्ते में आवागमन करते हैं। इनके अलावा अधिकांश गांवों में यही हालात है। अगर शासन प्रशासन ने शीघ्र इस ओर ध्यान नहीं दिया तो कभी भी कोई बड़ा हादसा घटित हो सकता है।
जिला प्रशासन ने इस मामले में संज्ञान लेगा। जिले में मिट्टी के अवैध खनन के मामलों में खनन अधिकारी को निर्देशित किया गया है कि वह ऐसे मामलों पर जांच कर कार्रवाई करें।
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कैप्टन शक्ति सिंह, जिला उपायुक्त
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