जिला उपभोक्ता आयोग
- जिला उपभोक्ता आयोग का फैसला, 8.85 लाख रुपये की क्लेम राशि पर छह प्रतिशत ब्याज के साथ 30 दिन में भुगतान का आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। बीमित व्यक्ति की मृत्यु के बाद बीमा कंपनी पूर्व बीमारी की जानकारी छिपाने का आरोप लगाकर क्लेम राशि देने से इंकार नहीं कर सकती, यदि वह अपने आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहती है। ऐसे ही एक मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को मृतक की पत्नी को 8.85 लाख रुपये की क्लेम राशि छह प्रतिशत ब्याज के साथ देने का आदेश दिया है। आयोग ने कंपनी को पांच हजार रुपये वाद व्यय के रूप में भुगतान करने के भी निर्देश दिए हैं। मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य अंजु शर्मा ने की।
ग्रेटर नोएडा के गुलिस्तानपुर गांव निवासी सुदेश के पति सुरेश ने स्टार यूनियन डायची लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की एसयूडी लाइफ समृद्धि पॉलिसी ली थी। इसके लिए उन्होंने 99,521 रुपये का प्रीमियम जमा किया था। 28 सितंबर 2018 को उन्हें प्रीमियम की रसीद मिली थी। पॉलिसी की वैधता 28 सितंबर 2018 से 28 सितंबर 2022 तक थी।
सुरेश की 18 जून 2019 को मृत्यु हो गई। पत्नी सुदेश ने इसकी सूचना कंपनी के कस्टमर केयर के टोल फ्री नंबर पर दी। कंपनी के कर्मचारियों के निर्देश पर उन्होंने पॉलिसी से संबंधित आवश्यक दस्तावेज भी जमा कर दिए। कंपनी की ओर से उन्हें 120 दिन के भीतर क्लेम राशि का भुगतान करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद सुदेश ने सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया।
सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने क्लेम खारिज करने का आधार बताते हुए कहा कि सुरेश ने पॉलिसी लेते समय अपनी पूर्व बीमारियों से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया था। कंपनी के अनुसार, प्रपोजल फॉर्म में सुरेश ने खुद को स्वस्थ घोषित किया था और किसी पूर्व बीमारी की जानकारी नहीं दी थी। कंपनी ने दावा किया कि यदि उसे पूर्व बीमारी की जानकारी होती तो वह पॉलिसी जारी नहीं करती। इसी आधार पर कंपनी ने 5 दिसंबर 2019 को क्लेम निरस्त कर दिया था।
आयोग ने दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों का अवलोकन किया। आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी मृतक के पूर्व उपचार से संबंधित कोई ठोस दस्तावेज, डिस्चार्ज समरी या मैक्स मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल में 5 मई 2018 को कराए गए सीटी स्कैन से संबंधित अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सकी। ऐसे में आयोग ने माना कि कंपनी अपने आरोपों को प्रमाणित करने में सफल नहीं रही।
आयोग ने कहा कि पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में पूर्व बीमारी का हवाला देकर क्लेम खारिज करना उचित नहीं है। इसे आयोग ने सेवा में कमी माना। जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को 8.85 लाख रुपये की क्लेम राशि पर छह प्रतिशत ब्याज और पांच हजार रुपये वाद व्यय सहित भुगतान करने का आदेश दिया। कंपनी को यह भुगतान आदेश की तारीख से 30 दिन के भीतर करना होगा।