-प्राधिकरण ने प्रदूषण रोकने के लिए किए गए कामों की दी है विस्तृत रिपोर्ट
-सुप्रीम कोर्ट ने समिति बनाकर काम के जमीनी निरीक्षण को दिया है निर्देश
-कोंडली नाले से प्रदूषण पर एनजीटी ने लगाया था 100 करोड़ का जुर्माना
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। यमुना में कोंडली नाले से हो रहे प्रदूषण को रोकने के लिए किए गए दावों की जमीनी हकीकत देखी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की समिति बनाकर निरीक्षण कर रिपोर्ट तलब की है। कोंडली नाले से यमुना के प्रदूषण पर पूर्व में राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने 100 करोड़ रुपये का जुर्माना नोएडा प्राधिकरण पर लगाया था। इससे बचने के लिए नोएडा प्राधिकरण सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है। मामले में जांच के लिए 13 अगस्त को समिति का गठन किया गया है।
अब समिति प्राधिकरण द्वारा न्यायालय में कोंडली ड्रेन को लेकर जमा की गई रिपोर्ट का जमीनी स्तर पर सत्यापन करेगी और अपनी रिपोर्ट कोर्ट में जमा करेगी। पर्यावरणविद् अभिष्ट कुसुम गुप्ता ने बताया कि प्राधिकरण ने जो स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में जमा की है उसमें 30 छोटे बड़े नालों का जिक्र किया गया है। इसमें से 6 नाले सूखे दिखाए गए और 5 नालों को बंद कर दिया गया है। बाकी 19 पर काम किया जा रहा है। इसी रिपोर्ट की जमीनी निरीक्षण किया जाएगा। प्राधिकरण ने दावा किया है कि शहर में 8 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) क्रियाशील हैं, जिन क्षमता प्रतिदिन 411 मिलियन लीटर डेली (एमएलडी) है। नोएडा प्राधिकरण ने ये भी कहा है कि 120 एमएलडी एसटीपी से साफ होकर निकलने वाले पानी से नोएडा के अलग-अलग सेक्टरों में सिंचाई की जा रही है। इस मामले में अगली सुनवाई 28 अक्टूबर 2025 होगी। इसके पहले बनने वाली समिति अपनी रिपोर्ट कोर्ट में रखेगी।
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