-अक्टूबर में ग्रेप लगने से थम जाएगा काम, पैचवर्क और रिसर्फेसिंग में प्राधिकरण ने झोंकी ताकत
माई सिटी रिपोर्टर,
नोएडा। बारिश में टूटी और उखड़ी सड़कों की मरम्मत नोएडा प्राधिकरण ने शुरू करवा दी है। लेकिन सीमित समय में जिले की 200 से अधिक टूटी सड़कों की रिसरफेसिंग व पैचवर्क कराना प्राधिकरण के लिए चुनौती साबित हो रहा है। इस माह में अब गिने-चुने दिन ही शेष हैं और अक्तूबर में ग्रेप लागू होने का अनुमान है। इतने कम समय में सभी काम पूरा कराने के लिए प्राधिकरण ने पूरी ताकत झोंक दी है। सर्किल प्रभारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
इस काम के लिए विशेष योजना भी बनी है। बताते चलें कि प्राधिकरण शहर की 200 से ज्यादा छोटी बड़ी सड़कों की देखरेख करता है। इस लिहाज से इन सड़कों की मरम्मत काम करवाने के लिए प्राधिकरण के पास समय कम है। सड़कों की मरम्मत की मंजूरी प्राधिकरण में इस बार पुराना रिकॉर्ड देखने के बाद दी जा रही है। यह देखा जा रहा है कि पहले सड़क कब बनी थी। कितना समय इसकी मजबूती के लिए तय था। इसके साथ ही बनाए जाने वाले एस्टीमेट व गुणवत्ता का परीक्षण भी करवाया जा रहा है। कई प्रकरण में इसको लेकर ओएसडी स्तर से निर्देश भी जारी किए गए हैं। इसके साथ ही करवाई जाने वाली मरम्मत का ब्यौरा तैयार कर रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्राधिकरण अधिकारियों ने बताया कि प्राथमिकता के आधार पर सड़कों का चयन कर मरम्मत शुरू करवाई गई है। प्राधिकरण के ओएसडी महेंद्र प्रसाद ने बताया कि सभी टूटी या उखड़ी सड़कों की मरम्मत करवाई जाएगी।
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नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेस-वे के काम दो दिन में होंगे पूरे-
ग्रेटर नोएडा में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो शुरू होने जा रहा है। इसके देखते हुए नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे को चमकाने का काम शुरू कर दिया गया है।नोएडा प्राधिकरण ने चिल्ला बॉर्डर, डीएनडी व कालिंदी कुंज से लेकर एक्सप्रेसवे के करीब 20 किलोमीटर दायर में मरम्मत, लाइटिंग व सजावट से संबंधित काम शुरू करा दिए गए हैं। प्राधिकरण के अधिकारियों बताया कि पूरे एक्सप्रेसवे और सर्विस रोड, जहां पर भी सड़क टूटी हुई है, उसको ठीक किया जा रहा है। फुटपाथ और सेंट्रल वर्जपर पेंट कराया जा रहा है। एक्सप्रेसवे की सेंट्रल वर्ज पर पौधे लगाए जा रहे हैं। खराब स्ट्रीट लाइटों को भी बदलने का काम शुरू कर दिया गया है। इसके अलावा एक्सप्रसेवे पर जो यूनिपोल व आईटीएमएस के पोल लगे हुए हैं, उनके भी नट-बोल्ट भी सुरक्षा के लिहाज से देखे जा रहे हैं।