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Noida News: रोबोटिक कैमरा तकनीक से होगी राजधानी के नालों की जांच

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-पायलट प्रोजेक्ट में दक्षिणी दिल्ली के नालों की सीसीटीवी कैमरे से होगी रियल टाइम जांच
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-जलभराव से निपटने, नालों की सफाई वैज्ञानिक ढंग से सुधारने को पीडब्ल्यूडी का प्रयोग
-30 दिन का ट्रायल शुरु करने जा रहा है विभाग दक्षिणी दिल्ली के एक सीमित क्षेत्र में
अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। दिल्ली में जलभराव की समस्या से निपटने और नालों की सफाई व्यवस्था को वैज्ञानिक ढंग से सुधारने की दिशा में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) एक नया प्रयोग करने जा रहा है। विभाग दक्षिणी दिल्ली के एक सीमित क्षेत्र में 30 दिन का ट्रायल शुरू करने जा रहा है, जिसके तहत पहली बार रोबोटिक सीसीटीवी कैमरा तकनीक से नालों और सीवर पाइपलाइन की जांच की जाएगी। इस तकनीक के जरिये पाइपलाइन के भीतर जमे सिल्ट, ब्लॉकेज, दरारों और प्रवाह में रुकावट की रियल टाइम पहचान की जा सकेगी।

विभाग के एक अधिकारियों का कहना है कि यह ट्रायल बिना जल प्रवाह रोके किया जाएगा। इसके लिए एक ठेकेदार को रोबोटिक कैमरा प्रणाली के माध्यम से ऑनलाइन जांच का जिम्मा सौंपा जा रहा है। इस प्रक्रिया में दबे हुए मैनहोल को खोजने, नालों की सटीक लाइन ट्रेसिंग, कॉरिडोर सर्वे और जीआईएस कोऑर्डिनेट्स के साथ रूट मैप तैयार करने का काम भी शामिल होगा। प्रारंभिक चरण में 1,200 मिमी, 1,800 मिमी और 2,400 मिमी व्यास वाली पाइपलाइनों की रोबोटिक जांच और जीआईएस आधारित मैपिंग की जाएगी। इस परियोजना पर लगभग 16.5 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। अधिकारियों का कहना है कि यह पहल दिल्ली में सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर के तकनीकी और डेटा आधारित प्रबंधन की दिशा में एक अहम कदम है।
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मैनुअल जांच होती थी जोखिम भरी
अब तक मैनुअल तरीके से की जाने वाली नालों की जांच न केवल जोखिमभरी होती थी, बल्कि सीमित जानकारी ही देती थी। नई प्रणाली के तहत इंजीनियर पाइपलाइन के भीतर से लाइव वीडियो फीड देखकर उनकी संरचनात्मक स्थिति का आकलन कर सकेंगे। रोबोटिक सिस्टम की मदद से नालों में जमी गाद, दरारें और संभावित चोक पॉइंट की पहचान आसानी से की जा सकेगी, जो बारिश के दौरान जलभराव रोकने के लिए बेहद जरूरी है। अधिकारी के मुताबिक इस ट्रायल से भविष्य में प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत योजना बनाने में मदद मिलेगी। अगर परिणाम सफल रहते हैं तो इस तकनीक को पूरे शहर में लागू किया जाएगा।
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