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Noida News: संस्कृति और इंजीनियरिंग कौशल की जीवंत मिसाल हैं अवध की इमारतें

Mon, 15 Sep 2025 02:18 AM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
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1798 से 1814 के बीच बनी छतर मंजिल नवाब सआदत अली खां ने अपनी मां छत्तर कुंवर के नाम पर बनवाना शु
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लखनऊ। अवध की धरती सिर्फ तहजीब और नजाकत के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अनूठी वास्तुकला और कारीगरी के लिए भी जानी जाती है। यहां बनीं इमारतें समय के उतार-चढ़ाव के बावजूद आज भी उसी शान-ओ-शौकत के साथ खड़ी हैं। न लकड़ी की पकड़ ढीली हुई न ईंटों का मेल टूटा। ये इमारतें संस्कृति और इंजीनियरिंग कौशल की ऐसी जीवंत मिसाल हैं, जिन पर हर लखनवी और भारतीय को गर्व है। यही वजह है कि लखनऊ की ये धरोहरें न सिर्फ देश में, बल्कि पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। आज इंजीनियर दिवस पर आइए जानते हैं इन अनमोल धरोहरों की खासियत...
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1784 में नवाब आसफ-उद-दौला द्वारा बनवाया गया बड़ा इमामबाड़ा राजधानी की पहचान है। हाफिज किफायतुल्लाह द्वारा डिजाइन की गई इस इमारत की खासियत यह है कि इसके निर्माण में न लकड़ी का उपयोग हुआ और न ही लोहे का। पूरी छत जटिल इंटरलॉकिंग ईंटों पर टिकी है। इसकी भव्यता मुगल और अवधी स्थापत्य शैलियों का अनुपम मिश्रण पेश करती है।

ब्रिटिश शासनकाल में बनी चारबाग रेलवे स्टेशन की नींव 1914 में बिशप जॉर्ज हर्बर्ट ने रखी थी और 1923 में यह तैयार हुआ। इसका ढांचा मुगल, राजस्थानी और अंग्रेजी वास्तुकला का संगम है। दूर से देखने पर यह इमारत किसी खूबसूरत महल जैसी प्रतीत होती है।
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1798 से 1814 के बीच बनी छतर मंजिल नवाब सआदत अली खां ने अपनी मां छत्तर कुंवर के नाम पर बनवाना शुरू किया था। इंडो-यूरोपियन और नवाबी स्थापत्य शैली से सजी इस इमारत की खास पहचान इसकी ऊपर बनी सुनहरी छतरी है, जिसके कारण इसका नाम पड़ा। इसकी भव्यता आज भी लखनऊ की पहचान में शुमार है।

18वीं सदी में जनरल क्लॉड मार्टिन ने इस इमारत की नींव रखी थी। ला-मार्टिनियर का मुख्य भवन पूर्वमुखी है और इसके आंतरिक हिस्से अरबी शैली की सजावट से सुसज्जित हैं। हॉल की छतें शास्त्रीय विषयों की झलक दिखाती हैं। विद्रोह के दौरान कई बार क्षतिग्रस्त होने के बावजूद यह इमारत आज भी अपनी भव्यता और ऐतिहासिक महत्व को संजोए हुए है।

1798 से 1814 के बीच बनी छतर मंजिल नवाब सआदत अली खां ने अपनी मां छत्तर कुंवर के नाम पर बनवाना शु

1798 से 1814 के बीच बनी छतर मंजिल नवाब सआदत अली खां ने अपनी मां छत्तर कुंवर के नाम पर बनवाना शु

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