ग्रेनो के विकास में निर्माण बढ़े, मलबा निस्तारण के लिए नया प्लांट लगाएगा प्राधिकरण
- 300 टन क्षमता का नया प्लांट अस्तौली में लगाए जाने की योजना पर काम शुरू
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा के तेज विकास के साथ ही निर्माण के काम भी बढ़े हैं। ऐसे में मौजूदा प्लांट पूरी तरह मलबे का निस्तारण नहीं कर पा रहा है। शहर में मलबा इकट्ठा होने और वायु प्रदूषण फैलाने की समस्या से बचने के लिए अब ग्रेनो प्राधिकरण एक नया प्लांट अस्तौली में लगाएगा। इसकी क्षमता करीब 300 टन प्रतिदिन की होगी। इसके लिए बृहस्पतिवार को ग्रेनो प्राधिकरण में एक प्री-बिड बैठक भी इच्छुक कंपनियों के साथ रही।
अधिकारियों का कहना है कि कंस्ट्रक्शन एंड डेमोलिशन (सीएंडडी) मलबा का निस्तारण होने के लिए एनजीटी ने गाइडलाइंस तय की हुई है। इसके अनुपालन में पहले ही एक प्लांट निजी कंपनी के साथ ग्रेटर नोएडा में चालू है। इकोटेक-3 सेक्टर में पीपीपी मॉडल पर चल रहे इस सीएंडडी वेस्ट प्लांट की क्षमता करीब 100 टन प्रतिदिन है। यहां मलबे से टाइल्स और दूसरे उपयोग द्वितीयक उत्पाद बनाए जाते हैं। शहर से मलबा अधिक मात्रा में निकलता है जो निस्तारण नहीं होने की वजह से लोग इधर-उधर फेंकते हैं। इस समस्या को खत्म करने के लिए दूसरा प्लांट शुरू कराया जाना है। मौजूदा प्लांट की भी क्षमता 300 टन किए जाने की प्रक्रिया निजी कंपनी के साथ बातचीत कर शुरू प्राधिकरण कराएगा।
प्री-बिड बैठक में भी प्लांट जल्दी शुरू करने के लिए कंपनियों से सुझाव लिए गए। अस्तौली में मौजूद जमीन के बारे में भी कंपनियों को जानकारी दी गई। उनको बताया गया है कि करीब 15 साल के लिए इस प्लांट का संचालन करना होगा। कंपनियां बताएं कि किस तरह वह प्लांट काे संचालित करेंगीं। वायु प्रदूषण किए बिना कैसे मलबे से उपयोगी उत्पाद कंपनियां बनाएंगीं। इस प्रोजेक्ट पर करीब 18.4 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। संचालन में लगी कंपनी को ग्रेटर नोएडा में मलबे को इकट्ठा करने के साथ प्लांट पर निस्तारित करने का काम भी करना होगा।