हिसार। एसआई रमेश की हत्या में आरोपी महेन्द्र उर्फ गब्बर गुज्जर ने हाल ही में 20 साल की सजा काट चुके हैं। महेंद्र उर्फ गब्बर गुजर को लिव इन रिलेशन में रहने वाली महिला की हत्या के आरोप में सजा हुई थी। करीब एक महीना पहले ही महेंद्र जेल से बाहर आया था। जेल से बाहर से आने के बाद महेंद्र उर्फ गब्बर लगातार धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने लगा था। लोगों को लगा कि वह सुधर गया है। अमित ने बताया कि महेंद्र उर्फ गब्बर अक्सर मेरे चाचा रमेश के पैर छूकर जाता था।
प्रत्यक्षदर्शी ढाणी श्यामलाल निवासी अमित ने पुलिस को दिए बयान देकर कहा कि वह बाजार में मोबाईल के कवर की सप्लाई करता हूं। मेरे साथ में चाचा कंवर सिंह का मकान है। दूसरे चाचा रमेश कुमार का भी मकान है। वीरवार की रात महेंद्र उर्फ गब्बर ,उसका बेटा सुभाष उर्फ साहिल, धर्मवीर उर्फ बबलू, राहुल, विक्रम उर्फ गोलू, अजय उर्फ नोनू वासियान ढाणी श्यामलाल, राजेश वासी मुलतानी चौक, लाला वासी मिलगेट, नरेन्द्र वासी मुलतानी चौक, जतिन सहित अन्य स्विफ्ट गाड़ी एवं दो स्कूटी पर तलवार, डंडे व चाकू लेकर आए। विक्रम ने ललकारा मारा कि आज मेरे बाप जसवंन्त उर्फ कालिया ने कहा है कि इनको जिन्दा नहीं छोडऩा है। वे मेरे मकान के सामने पड़ी ईंटें उठाकर मेरे व चाचा कंवर सिंह के मकान पर फैंकने लगे। मैं बाहर निकला तो सुभाष उर्फ साहिल मेरे चाचा कंवर सिंह के मकान के बाहर चाकू लेकर खड़ा था। बाकी अपने हथियारों सहित खड़े थे। वे मेरे साथ मारपीट करने लगे और मेरी आवाज सुनकर चाचा कंवर सिंह अपने मकान से बाहर निकला। मेरे चाचा कंवर सिंह को सुभाष उर्फ साहिल चाकू मारने लगा। चाचा कंवर सिंह ने उसे पकडऩे की कोशिश की तो सभी ने मेरे चाचा के साथ भी झगड़ा किया। शोर सुनकर चाचा रमेश कुमार मकान से बाहर निकलने लगे। तब सभी ने चाचा रमेश कुमार को जान से मारने की नियत से घर में घुसकर ईंटें मारी। चाचा रमेश कुमार के सिर में चोटें लगी और वह फर्श पर गिर गए। तब हमलावर धमकी देते हुए फरार हो गए।