संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। शहर के वातावरण में प्रदूषण का स्तर बढ़ता ही जा रहा है। दो दिनों से प्रदूषण स्मॉग बन गया है। स्मॉग की वजह से धूप भी बेअसर होने लगी है। वातावरण में चारों तरफ धुंधलापन है। ठीक से कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा। दृश्यता 14 किलोमीटर दर्ज की गई। शुक्रवार को शहर का एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) 289 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। स्मॉग के कारण बुजुर्गों और दमा रोगियों को काफी परेशानी होने लगी है। पर्यावरण विशेषज्ञ के अनुसार वातावरण में धूल व धुएं के कणों की मात्रा बढ़ने, हवा न चलने, तापमान में कमी व बादल छाने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। जिले का अधिकतम तापमान 24 डिग्री व न्यूनतम 11 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अधिकतम तापमान दो डिग्री तक कम हो गया है। एक्यूआई के आंकड़े बताते हैं कि वातावरण में प्रदूषण का स्तर ज्यादा खराब है। वातावरण में पीएम 2.5 व पीएम10 की मात्रा का बढ़ना मानव के स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक होता है। पर्यावरण विशेषज्ञ के अनुसार पीएम 2.5 की श्रेणी में कण इतने छोटे होते हैं कि उन्हें केवल इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप की मदद से ही देखा जा सकता है।
यह कण सांस के साथ आसानी से शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। पीएम 10 वो कण हैं जिनका व्यास 10 माइक्रोमीटर होता है। दोनों ही कण खतरनाक होते हैं और फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। नवंबर में एक्यूआई का स्तर दो नवंबर के बाद सबसे ज्यादा है। दो नवंबर को एक्यूआई 320 माइक्रोग्राम दर्ज किया था। इसके बाद से महज तीन दिन छह, 11 व 12 नवंबर को हवा की स्थिति थोड़ी ठीक हुई। वरना एक्यूआई 250 माइक्रोग्राम से ऊपर बना हुआ है। 19 नवंबर को यह 250, 20 को 258 माइक्रोग्राम था।
एहतियात बरतें अस्थमा के मरीज : डॉ. जितेंद्र सिंह
सिविल सर्जन डाॅ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि ये मौसम अस्थमा के मरीजों के लिए अच्छा नहीं माना जाता। इस मौसम में सीवियर एक्यूट ब्रोंकाइटिस अस्थमा का असर बढ़ जाता है। अस्थमा के मरीजों को एहतियात बरतना चाहिए। सुबह और शाम पांच से सात बजे के बीच मौसम में अचानक बदलाव आ रहा है। बाहर जाएं तो कैप पहन कर जाएं। नियमित व्यायाम करें। इनमें प्राणायाम, गहरी सांस लेकर किए जाने वाले व्यायाम को प्राथमिकता दें। इससे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। नाक साफ रखे, गले को खराब होने से बचाएं। तली-भुनी चीजों से परहेज करें। जरूरी न हो तो बाहर न निकलें।
इन कारणों से बनता है स्मॉग
मौसम विशेषज्ञ डाॅ. अजीत कुमार ने बताया कि वैसे तो वातावरण में हर समय धूल व धुएं के कण मौजूद रहते हैं, मगर कुछ गतिविधियों से वातावरण में इनकी मात्रा बढ़ जाती है। अगर वातावरण में नमी की मात्रा ज्यादा है और तापमान भी कम है तो उस स्थिति में धूल व धुएं के कण नमी के साथ मिलकर बड़े आकार के व भारी हो जाते हैं और वातावरण से बाहर नहीं जा पाते। फिर यह स्मॉग (धुएं की चादर) के रूप में नजर आते हैं।