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दुष्कर्म के मामले में किशोर को 19 साल बाद दोषी माना

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नोएडा। किशोर न्याय बोर्ड ने किशोरी से दुष्कर्म के मामले में अपचारी किशोरी को 19 साल बाद दोषी घोषित किया है। उसे 3 साल के लिए विशेष गृह इटावा भेजने का आदेश दिया है। इसमें बाल सुधार गृह में बिताया हुआ समय भी शामिल किया गया है। यह मामला वर्ष 2002 में दादरी कोतवाली क्षेत्र में सामने आया था। किशोरी जब 5 माह की गर्भवती हुई तब दुष्कर्म का पता चला था।
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किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य अनीत बघेल और अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता अमित उप्पल ने बताया कि दादरी कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में पड़ोस में रहने वाली किशोरी को घर में अकेला पाकर किशोर ने दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया था। आरोप था कि किशोरी को जान से मारने की धमकी दी गई थी, जिससे वह डर गई और किसी को घटना की जानकारी नहीं दी। करीब 5 माह बाद जब किशोरी की तबीयत खराब हुई तब उसके गर्भवती होने का पता चला। इसके बाद किशोरी से पूछताछ की गई तो उसने पड़ोसी किशोर का नाम बताया था।
परिजनों ने रिपोर्ट दर्ज कराई तो किशोर को बालिग मानते हुए दादरी पुलिस ने अदालत में पेश किया था। अदालत के समक्ष पेश किए दस्तावेज से वह किशोर साबित हुआ। तब मामला किशोर बोर्ड के समक्ष भेज दिया गया। कुछ दिन बाल सुधार गृह में रहे किशोर को जमानत मिल गई। वहीं, केस की सुनवाई चलती रही। मंगलवार को किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट वीरेश चंद्रा ने दोनों पक्षों की बहस सुनी और अंत में बयानों के आधार पर किशोर को दुष्कर्म का दोषी मानते हुए उसे तीन साल के लिए इटावा स्थित विशेष गृह भेजने के आदेश दिए। पांच हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर एक माह की अतिरिक्त विशेष गृह में रहना होगा।
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