तावडू। जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्र-छात्राओं की वर्दी का लंबित डाटा पूरा नहीं होने तक शिक्षा विभाग के एसीएस ने शिक्षकों का वेतन रोकने का फरमान जारी किया है। इस आदेश के बाद शिक्षकों में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं हरियाणा विद्यालय अध्यापक संध के जिला उप प्रधान शिक्षक फूलकुमार ने इसे तुगलकी फरमान बताते हुए इस आदेश को रद्द करने की मांग की है।
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी कपिल पूनिया नूंह ने जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारी सह आहरण वितरण अधिकारी को पत्र क्रमांक ए-2/19/96-100 दिनांक 26 सितंबर जारी कर कहा है कि एसीएस शिक्षा विभाग हरियाणा के निर्देशानुसार जब तक वर्ष 2018-19 के छात्र छात्राओं की वर्दी का लंबित डाटा पूरा नहीं हो जाएगा। तब तक किसी कर्मचारी का वेतन आहरण वितरण अधिकारी द्वारा जारी नहीं किया जाएगा। यदि आहरण वितरण अधिकारी (डीडीओ) निर्देश के बाद आदेश की अवहेलना करता है, तो उसके विरूद्ध सख्त अनुशासनिक कार्रवाई हेतु उच्च अधिकारियों को लिख दिया जाएगा।
इस तुगलकी आदेश बताते हुए हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ नूंह के जिला उप प्रधान फूल कुमार यादव ने सख्त एतराज किया है। वहीं अध्यापक वर्ग में भी भारी रोष है। उनके मुताबिक कोई भी अध्यापक नहीं चाहता कि किसी भी छात्र छात्रा को वर्दी का पैसा न मिले। लेकिन छात्र छात्राओं के अभिभावकों की अनदेखी व जागरूकता के अभाव के कारण बच्चों के खाते नहीं खुल पा रहे हैं। उप प्रधान का कहना है कि नवरात्रे व त्योहारों का समय है जिस पर अध्यापकों पर वैसे ही अतिरिक्त व्यय बढ़ गया है। लेकिन शिक्षा विभाग द्वारा अध्यापकों का मासिक वेतन रोक लेना तानाशाही रवैया है। उन्होंने मांग की है कि अविलंब अध्यापकों का वेतन उपलब्ध कराया जाए और इस फरमान का वापिस लिया जाए।
इस बारे में खंड शिक्षा अधिकारी तावडू रमेश मलिक का कहना है कि विभाग के आदेश की पालना की जाएगी। लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बच्चों के खाते खुलवाने की जिम्मेवारी शिक्षकों को सौंपी गई है। ग्रामीण क्षेत्र में परिजन गरीब व जागरूक नहीं हैं इसलिए शिक्षकों का इस मामले में कोई बहाना नहीं चलेगा।