शासन प्रशासन की तरफ से निजी विद्यालयाें की तर्ज पर जिले के परिषदीय विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं से विकसित किया जा रहा है। इसके बावजूद कम छात्र वाले विद्यालयों का विलय करने की नौबत आ गई। जिले के कई परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों ने सामुदायिक सहभागिता से अपने विद्यालय को आधुनिक सुविधाओें से लैस कर मिसाल पेश की है। शिक्षकाें ने नवाचार और विद्यालयोंं के बच्चों ने जनपद सहित व राज्यस्तर पर परचम फहराकर अपनी श्रेष्ठता साबित की है।शिक्षक दिवस पर विभिन्न शिक्षक संगठनों की तरफ से उत्कृष्ट शिक्षको को पुरस्कृत किया जाएगा।
प्राथमिक विद्यालय कइया के शिक्षक ने प्रदेश स्तर पर बनाई पहचान
मऊ। रतनपुरा ब्लाॅक क्षेत्र के कइया स्थित प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापक अंजनी कुमार सिंह ने नवाचार के जरिये राज्यस्तर पर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। इन्होंने राज्य स्तर और जनपद स्तर पर पुरस्कार हासिल कर मिसाल कायम की है। सहायक अध्यापक अंजनी कुमार सिंह ने सामुदायिक सहभागिता से अपने विद्यालय को आधुनिक सुविधाओं से लैस करा दिया है। इन्होंने वर्ष 2017 में राज्यस्तरीय आईसीटी पुरस्कार हासिल किया था। इसी तरह से वर्ष 2019 में उत्कृष्ट विद्यालय पुरस्कार हासिल किया। विद्यालय के बच्चों को खेल प्रतियोगिता के लिए अपना अतिरिक्त समय देकर तैयारी कराते हैं। वर्ष 2018 में इनके विद्यालयों के बच्चों ने पीटी और विशेष प्रदर्शन में स्वर्ण और कांस्य पदक हासिल किया।
दुबारी-एक के सहायक अध्यापक ने एडवांस ग्रुप के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की
मधुबन। फतहपुर मंडाव ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय दुबारी-एक पर कार्यरत शिक्षा के उत्थान के लिए सकारात्मक प्रयास करने वाले शिक्षक बालमुकुंद पांडेय ने अपने विद्यालय को सामाजिक विश्वास का केंद्र बना दिया है। वर्ष 2018 से प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत इस शिक्षक ने शिक्षा को नया आयाम दिया है। फरवरी 2009 से वह सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने विद्यालय का कायाकल्प कर आकर्षक स्वरूप प्रदान किया। वाॅल पेंटिंग, स्वच्छ परिवेश, आईसीटी आधारित शिक्षण, बेसिक और एडवांस ग्रुप के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की। बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए इन्होंने यादों का पिटारा गतिविधि बुक भी तैयार की। इनके प्रयासों का नतीजा है कि विद्यालय में नामांकन और उपस्थिति दोनों बढ़ रही है। वर्ष 2023-24 में नामांकन 272 था। वर्ष 2025-26 में बढ़कर 291 हो गया। उपस्थिति प्रतिशत भी 75 से बढ़कर 82 तक पहुंच गया। लगभग 40 प्रतिशत विद्यार्थी प्रतिदिन शत-प्रतिशत उपस्थिति दर्ज कराते हैं। सहायक अध्यापक को जिला और ब्लॉक स्तर पर लगातार तीन साल से उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रमाणपत्र मिला है। साथ ही विद्यालय को दो वर्ष निपुण विद्यालय का प्रमाणपत्र भी मिला है।
अनिल कुमार मौर्य ने बदली विद्यालय की तस्वीर, दोगुना हुआ नामांकन
मधुबन। रानीपुर ब्लॉक के उच्च प्राथमिक विद्यालय दौलसेपुर में कार्यरत प्रभारी प्रधानाध्यापक अनिल कुमार मौर्य ने अपने समर्पण और नवाचार से शिक्षा की नई इबारत लिखी है। 07 अक्तूबर 2013 को जब उन्होंने विद्यालय का कार्यभार संभाला, उस समय छात्र संख्या मात्र 108 थी। यह लगातार बढ़ते हुए आज 216 तक पहुंच गई है। उनके नेतृत्व में विद्यालय ने शैक्षणिक और सहशैक्षणिक दोनों ही क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा में वर्ष 2024 में 19, 2025 में 11 बच्चों सहित अब तक कुल 56 छात्र चयनित हो चुके हैं। वहीं, श्रेष्ठता परीक्षा में भी अब तक 4 बच्चों का चयन हुआ है। खेलकूद प्रतियोगिताओं में भी यह विद्यालय अव्वल रहा है। मंडलीय बेसिक बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता 2024-25 में विद्यालय की तीन टीमों ने बालक खो-खो, बालिका योगा और बालिका जिम्नास्टिक मेें स्वर्ण पदक अपने नाम किए। इसके अलावा एचसीएल फाउंडेशन द्वारा आयोजित उत्तर प्रदेश स्टेट क्वालिफायर 2024 में खो-खो बालक टीम उपविजेता रही। चार बच्चों का चयन राज्य स्तरीय टीम के लिए हुआ। राज्य स्तरीय योग प्रतियोगिता में विद्यालय के विद्यार्थियों ने रजत व कांस्य पदक अर्जित किए, जबकि मेरी उड़ान प्रतियोगिता में छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का परचम लहराया। शिक्षा और खेल दोनों ही क्षेत्रों में इस विद्यालय की उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि समर्पित शिक्षक के नेतृत्व में विद्यालय बच्चों के भविष्य को नई दिशा दे सकता है।
अपने वेतन से 30 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देतेे हैं हेडमास्टर डॉ. रामबिलास भारती
मऊ। जिले के घोसी स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक डॉ. रामबिलास भारती ने सामुदायिक सहभागिता से विद्यालय को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर दिया है। इन्हें राज्यस्तरीय शिक्षक पुरस्कार मिल चुका है। शिक्षक डॉ. रामविलास भारती ''पे बैंक टू सोसाइटी'' की ओर से जगपूरनी देवी बरखू शैक्षिक समृद्धि छात्रवृत्ति निजी वेतन से 30 मेधावी छात्रों को प्रदान करते हैं। हर छात्र को 1200 रुपये वार्षिक की यह छात्रवृत्ति तब तक दी जाएगी, जब तक छात्र स्नातक, परास्नातक या पीएचडी पूरी नहीं कर लेते।